बेसिक में कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कहीं सीनियर का..... बड़े अफसर मौन
बरेली के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों (BEO) को आदेश दिए हैं कि वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस मानकर तबादला/समायोजन किया जाएगा। वहीं अमेठी में कनिष्ठम शिक्षक को सरप्लस मानकर उनका तबादला कर रहे हैं। शासन और बेसिक शिक्षा निदेशालय के स्तर से इस बारे में कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिए गए हैं।
शिक्षकों ने उठाए सवाल : यह मामला सिर्फ इन दो जिलों तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर में यही स्थिति है। अंतर्जनपदीय तबादलों/समायोजन में BSA अपने स्तर से सर्कुलर जारी कर नियम तय कर रहे हैं। इस तरह मनमाने नियमों की वजह से एक बार फिर तबादलों पर सवाल उठने लगे हैं। बांदा में तो शिक्षकों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मांग की है कि कनिष्ठम शिक्षक का तबादला न किया जाए।
हर जिले में अलग आदेश : अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से समायोजन के संबंध में जो आदेश दिए गए हैं, उसमें लिखा है कि किसी भी स्कूल में दो शिक्षक रहना अनिवार्य है। कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समायोजन वरिष्ठ शिक्षक को माना जाएगा या कनिष्ठ शिक्षक को? इसके बाद अब सभी जिलों में BSA अपने स्तर से तबादलों के आदेश कर रहे हैं। लखीमपुर खीरी और बरेली सहित कई जिलों में बीएसए ने वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस मानकर तबादलों के आदेश दिए हैं। वहीं, अमेठी और रायबरेली सहित कई जिलों में कनिष्ठ शिक्षकों के तबादले के आदेश दिए हैं। जबकि, लखनऊ समेत कुछ जिले अभी तक तबादलों की प्रक्रिया ही शुरू नहीं कर रहे हैं। अब इन तबादलों के खिलाफ शिक्षकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इस बारे में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित ग्रेजुएट असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि अधिकारियों को स्पष्ट नियम बनाने चाहिए। उसके अनुसार ही तबादले हों। तबादलों में स्पष्ट नीति न होने की वजह से विवाद खड़े होते हैं।
वहीं, उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ की अध्यक्ष मोनिका रानी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। वहीं, अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि समायोजन प्रकरण न्यायालय में है। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं कह सकते

