चिंता बढ़ा रही फोन की लत, लगातार स्क्रीन टाइम से कमजोर हो रहा दिमाग : स्टैनफोर्ड अध्ययन
कैलिफोर्निया। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की बढ़ती लत अब मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि लगातार फोन स्क्रॉल करने और हर समय नोटिफिकेशन चेक करने की आदत दिमाग को अत्यधिक संवेदनशील और बेचैन बना रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब लोग सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं या बार-बार फोन देखते हैं तो दिमाग में डोपामाइन नामक रसायन सक्रिय होता है, जो तुरंत मिलने वाली खुशी का एहसास कराता है। धीरे-धीरे व्यक्ति इसी त्वरित संतुष्टि का आदी हो जाता है और सामान्य गतिविधियों में रुचि कम होने लगती है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित करता है। कई लोगों ने यह शिकायत की कि वे “सिर्फ पांच मिनट” फोन देखने बैठते हैं, लेकिन देखते-देखते घंटों निकल जाते हैं। इससे काम में बाधा, मानसिक थकान और चिंता बढ़ने लगती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट से कुछ समय का ब्रेक लेने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार देखा गया। पीएनएएस नेक्सस और हार्वर्ड से जुड़े अध्ययनों के अनुसार, जिन लोगों ने 14 दिनों तक स्मार्टफोन इंटरनेट उपयोग सीमित किया, उनमें चिंता, अवसाद और नींद संबंधी समस्याओं में कमी दर्ज की गई।
अध्ययन में शामिल 467 लोगों को दो सप्ताह तक फोन पर केवल कॉल और मैसेज की अनुमति दी गई। परिणामस्वरूप उनका ध्यान बेहतर हुआ, चिंता कम हुई और नींद की गुणवत्ता में सुधार देखा गया।
कैसे करें बदलाव?
उन चीजों की पहचान करें जो आपका सबसे ज्यादा समय लेती हैं।
स्क्रीन टाइम कम करने के लिए सकारात्मक गतिविधियों को अपनाएं।
सोने से पहले मोबाइल का उपयोग कम करें।
नींद, काम और मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान दें।
जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिमाग में “प्लास्टिसिटी” होती है, यानी सही आदतों के जरिए इसे दोबारा बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए मोबाइल और सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

