पत्नी को सरकारी नौकरी मिलने पर प्रभावित होगा गुजारा भत्ता
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी को सरकारी नौकरी मिल जाती है तो परिस्थितियों में बदलाव के कारण भरण-पोषण भी प्रभावित होगा। भरण-पोषण को सरकारी नौकरी प्राप्त करने से पहले की अवधि तक सीमित रखना पर्याप्त होगा। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अचल सचदेव ने याची पत्नी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है।
हाई कोर्ट सीआरपीसी की धारा 397, 401 के साथ परिवार न्यायालय अधिनियम की धारा 96(4) के तहत पत्नी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें सीआरपीसी की धारा 125 के तहत दायर भरण-पोषण मामले में फैमिली कोर्ट बस्ती के फैसले को चुनौती दी गई थी।
फैमिली कोर्ट ने विपक्षी (पति) को निर्देश दिया था कि वह पत्नी को भरण-पोषण के रूप में प्रति माह 10 हजार रुपये का भुगतान करे, लेकिन यह राशि नौकरी पाने तक सीमित कर दी गई। इस आदेश को चुनौती देते हुए याची ने कहा था कि गुजारा भत्ता जारी रखा जाए।
एकल पीठ ने कहा, “धारा 125 सीआरपीसी (अब 144 बीएनएसएस) और हिंदू दत्तक ग्रहण व भरण-पोषण अधिनियम की धारा 18 के तहत भरण-पोषण प्रदान करने का मूल सिद्धांत यह है कि दावेदार स्वयं भरण-पोषण करने में असमर्थ हो। यदि पत्नी को सरकारी नौकरी मिल जाती है तो यह परिस्थितियों में बदलाव माना जाएगा।”
याची व विपक्षी का विवाह 22 मई 2017 को हुआ था। पत्नी का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने के कारण ससुराल में उसे प्रताड़ित किया गया। उसने ससुराल वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए, 323, 504, 506, 316 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत बस्ती कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई। गुजारा भत्ता मांगने को लेकर यह मामला अदालत पहुंचा।

