एसआईआर से नतीजे प्रभावित हुए तो अर्जी दें ममता : अदालत
नई दिल्ली, । सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस से कहा कि यदि उसे लगता है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वजह से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए हैं तो औपचारिक रूप से अर्जी दाखिल करे।
शीर्ष अदालत ने यह सुझाव टीएमसी के उस दावे के बाद दिया, जिसमें कहा गया कि एसआईआर की वजह से व्यापक रूप से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष टीएमसी ने दावा किया कि 31 सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर, एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की संख्या से काफी कम था। टीएमसी की ओर से अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि कई सीटों पर सूची से हटाए गए नामों की संख्या और हार का अंतर लगभग एक जैसा ही था।
बंदोपाध्याय ने न्यायमूर्ति बागची द्वारा एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गइ उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर जीत का अंतर हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम है, तो इस मामले की न्यायिक जाच की जरूरत पड़ सकती है।
इसके बाद न्यायमूर्ति बागची ने टीएमसी की ओर से पेश अधिवक्ता बंदोपाध्याय से कहा कि ‘आप नतीजों के बारे में जो कुछ भी कहना चाहते हैं... कि उन पर हटाए गए नामों की वजह से काफी असर पड़ा है (जिन नामों की जांच अभी चल रही है)... उसके लिए आपको अलग से एक अर्जी दाखिल दायर करना होगा।’
एक सीट पर सिर्फ 862 मतों के अंतर से हार : तृणमूल
तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बंदोपाध्याय ने दावा किया कि एक सीट पर टीएमसी उम्मीदवार को महज 862 वोटों के अंतर से हार मिली, जबकि इस सीट से पांच हजार से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए और उनकी अपीलें अब भी लंबित हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी और भाजपा के बीच वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था और अपीलीय न्यायाधिकरणों के सामने लगभग 35 लाख अपीलें अभी भी लंबित हैं।

