यूपी में फिर बढ़ी गर्मी, काशी सबसे गर्म; 10 जून को लू और 45°C तापमान का अलर्ट
वाराणसी समेत पूरे प्रदेश में एक बार फिर गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। तापमान के लिहाज से काशी प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। मौसम विभाग ने 10 जून के लिए लू (हीटवेव) का अलर्ट जारी किया है और उस दिन तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई है।
शुक्रवार सुबह से ही तेज धूप और बढ़ते तापमान ने लोगों को परेशान किया। दोपहर के समय सूरज की तपिश बेहद तीखी रही, जिससे सड़कों और बाजारों में लोगों को गर्मी का तीव्र एहसास हुआ। दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री अधिक 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.7 डिग्री अधिक है।
प्रदेश में वाराणसी सबसे गर्म शहर रहा। इसके बाद कानपुर में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि 41.8 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रयागराज तीसरे स्थान पर रहा।
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को हवा की दिशा में बदलाव देखने को मिला। पछुआ हवाओं की जगह पुरवा हवाएं चलने लगीं, जिससे वातावरण में नमी बढ़ गई और उमस भरी गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 28 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रह सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री अधिक रहने की संभावना है। साथ ही 12 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूर्वी हवाएं चल सकती हैं। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 65 से 70 प्रतिशत और शाम को 20 से 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे उमस का प्रभाव और बढ़ सकता है।
पिछले 24 घंटों के दौरान बढ़ी नमी और ऊंचे तापमान के कारण प्रदेश के कई जिलों में झुलसाने वाली गर्मी का असर महसूस किया गया। मौसम विभाग के अनुसार भारत में सक्रिय हो चुके मानसून का प्रभाव जल्द ही प्रदेश के मौसम पर भी दिखाई दे सकता है।
10 जून से कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना है। बारिश होने पर लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि अधिकांश स्थानों पर केवल हल्की बूंदाबांदी की ही संभावना है। इसके बावजूद तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है।

