शिक्षा विभाग घोटाले में 14 ठिकानों पर छापेमारी, सात करोड़ के घपले के रिकार्ड खंगाले
अमेठी के बेसिक शिक्षा विभाग में लगभग चार करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में सीबीआई ने भी केस दर्ज कर जांच शुरू की है। सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच की टीमों ने बुधवार को अमेठी के अलावा लखनऊ, अयोध्या, कुशीनगर व प्रतापगढ़ स्थित 14 ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें सर्वाधिक अमेठी के आठ ठिकाने शामिल थे। छापेमारी में कई दस्तावेज व डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। सीबीआई ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश पर मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
सीबीआई के अनुसार मामले में अमेठी के गौरीगंज थाने में दर्ज मुकदमे को आधार बनाकर 8 जून को जांच एजेंसी ने अपना केस दर्ज किया था। मामला बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा अनुभाग में सरकारी धन के गबन से जुड़ा है। प्राथमिकी वित्त एवं लेखा अधिकारी, बेसिक शिक्षा विभाग गौरीगंज की शिकायत पर 21 मार्च 2025 को मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। सीबीआई ने अपने केस में तत्कालीन कनिष्ठ लेखा लिपिक मनोज कुमार मालवीय, ब्लाक क्वालिटी कोआर्डिनेटर अभिषेक सिंह, ब्लाक एमआईएस कोआर्डिनेटर शिवम कुमार पांडेय, प्राथमिक विद्यालय बेछूगढ़, जगदीशपुर के प्रधानाध्यापक श्रवण कुमार द्विवेदी तथा प्राथमिक विद्यालय पूरे शिवदास, गौरीगंज के सहायक अध्यापक शैलेश चंद्र शुक्ल को नामजद किया है। आरोप है कि मनोज कुमार मालवीय ने सह-आरोपियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची थी। आरोपितों ने सरकारी खजाने से विभिन्न बैंक खातों में अवैध रूप रकम ट्रांसफर कर लगभग चार करोड़ रुपये हड़पे। सीबीआई को छापेमारी में आरोपितों के ठिकानों से संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, मोबाइल फोन, कंप्यूटर डाटा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
कई खातों में तो बार-बार धनराशि भेजी गई
जांच के दौरान कई ऐसे खाते मिले जिनमें बार-बार सरकारी धनराशि भेजी गई थी। इसके बाद मनोज मालवीय फाइल लेकर ही फरार हो गए। कुछ दिनों तक लेखाधिकारी ने इंतजार किया इसके बाद 12 जनवरी 2025 को मनोज मालवीय पर फाइल लेकर गायब होने का मुकदमा कराया। जांच में सामने आया कि शिक्षकों के जीपीएफ और अन्य देयकों की रकम फर्जी या गलत बेनेफिशरी आईडी बनाकर दूसरे खातों में स्थानांतरित की जा रही थी।
सीबीआई के अफसर कर रहे इनकी तलाश
सीबीआई बेसिक शिक्षकों के जीपीएफ व अन्य देयकों के फर्जी भुगतान व गबन के मामले में सीबीआई आरोपी बर्खास्त आउटसोर्सिंग कर्मी शिवम पांडेय, अभिषेक सिंह तथा सहायक शिक्षक श्रवण द्विवेदी की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी की। आरोपी कनिष्ठ लेखा लिपिक मनोज मालवीय के लखनऊ व अयोध्या स्थित ठिकानों पर छानबीन की गई। सूत्रों के अनुसार एक खाते में 11 लाख रुपये ट्रांसफर किए जाने की भी जांच की जा रही है। सीबीआई की एक टीम गौरीगंज कोतवाली भी पहुंची थी।
अमेठी। बेसिक शिक्षा विभाग में सामने आए बहुचर्चित करोड़ों रुपये के कथित गबन प्रकरण में सीबीआई की एंट्री के बाद बुधवार को दिन भर गहमागहमी का माहौल रहा। दिसंबर 2024 में एक संदिग्ध भुगतान से शुरू हुई जांच ने धीरे-धीरे करोड़ों रुपये के घोटाले का रूप ले लिया। शुरुआती जांच में जहां 3.34 करोड़ रुपये के गबन की बात सामने आई थी, वहीं बाद की जांचों में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग सात करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
कैसे खुला खेल : वित्त एवं लेखाधिकारी किशन गुप्ता के अनुसार दिसंबर 2024 में भुगतान के लिए प्रस्तुत एक पत्रावली की जांच के दौरान उन्हें एक ऐसा लाभार्थी दिखाई दिया जिसके खाते में पहले भी भुगतान किया जा चुका था। संदेह होने पर जांच कराई गई तो संबंधित कनिष्ठ लेखा लिपिक मनोज मालवीय ने इसे त्रुटि बताया। करीब पांच लाख रुपये की रिकवरी के निर्देश दिए गए, जिसमें दो लाख रुपये वापस जमा करा दिए गए। लेकिन शेष तीन लाख रुपये वापस नहीं किए गए। इसके बाद पुरानी भुगतान पत्रावलियों की गहन जांच शुरू हुई।
जांच के दौरान कई ऐसे खाते मिले जिनमें बार-बार सरकारी धनराशि भेजी गई थी। इसके बाद मनोज मालवीय फाइल लेकर ही फरार हो गए। कुछ दिनों तक लेखाधिकारी ने इंतजार किया इसके बाद 12 जनवरी 2025 को मनोज मालवीय पर फाइल लेकर गायब होने का मुकदमा कराया। जांच में सामने आया कि शिक्षकों के जीपीएफ और अन्य देयकों की रकम फर्जी या गलत बेनेफिशरी आईडी बनाकर दूसरे खातों में स्थानांतरित की जा रही थी।

