सख्ती:सिबिल स्कोर कम हुआ तो ऋण लेने में होगी परेशानी
बैंकों से कर्ज लेकर जीवन चलाने वाले ग्राहकों को अब अपना सिबिल स्कोर बेहतर रखना होगा। सिबिल एक तीन अंकों (300 से 900) का क्रेडिट स्कोर होता है जो किसी व्यक्ति की लोन लेने की योग्यता और वित्तीय विश्वसनीयता को दर्शाता है। यह स्कोर आपके पुराने लोन चुकाने के इतिहास और क्रेडिट कार्ड के बिल भुगतान पर निर्भर करता है। अगले वर्ष से बैंकों पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का नया नियम लागू हो रहा है, जिसके तहत 730 से कम सिबिल स्कोर वाले ग्राहकों को बैंकों से ऋण लेने में परेशानी होगी या फिर ज्यादा ब्याज भरना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में बैंकों के करीब 60 फीसदी ग्राहक प्रभावित होंगे। निर्देशों पर एक अप्रैल 2027 से लागू होने वाले नए अनुमानित कर्ज हानि यानी ईसीएल फ्रेमवर्क का असर कम सिबिल स्कोर वाले ग्राहकों पर पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक के इन नए नियमों के तहत बैंकों को अपने खातों में संभावित खराब कर्ज यानी एनपीए का अनुमान लगाना होगा। इसके बाद बैंकों को अपने मुनाफे से बड़ी रकम रिजर्व के तौर पर रखनी होगी।
ऐसे में बैंक उन ग्राहकों को ऋण देने से बचेंगे, जिनकी सिबिल स्कोर ठीक नहीं होती है। भारत में ग्राहकों द्वारा किस्त को समय पर जमा नहीं किया जाता है या फिर क्रेडिट कार्ड पर लिए गए ऋण को समय पर नहीं भरा जाता है। बैंक ऐसे ग्राहकों के सिबिल स्कोर को कम कर देते हैं।
चरण स्थिति जोखिम का स्तर प्रावधान (सुरक्षित जमा)
1 सामान्य ऋण कम क्रेडिट जोखिम 12 माह की अपेक्षित हानि
(करीब 0.25%)
2 जोखिम बढ़ने की स्थिति बढ़ता हुआ जोखिम लगभग 50 फीसदी
3 डिफॉल्ट /एनपीए उच्च जोखिम अपेक्षित हानि 100% तक
एनपीए की उप-श्रेणियां
श्रेणी अवधि प्रावधान
D-1 प्रारंभिक एनपीए 25%
D-2 1 से 3 वर्ष तक 40%
D-3 3 वर्ष से अधिक 00%

