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Wednesday, June 24, 2026

एक ही यूपीआई एप पर सभी ऑटो-पे दिखेंगे

एक ही यूपीआई एप पर सभी ऑटो-पे दिखेंगे

नई दिल्ली, एजेंसी। यूपीआई से भुगतान करने वाले लोगों को जल्द नई सुविधा मिलने वाली है। राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ऐसा फीचर तैयार कर रहा है, जिसके तहत ग्राहक अपने सभी यूपीआई ऑटोपे भुगतान (ई-मैंडेट) को किसी भी एक यूपीआई ऐप पर एक साथ देख और उन्हें ट्रैक कर सकेंगे।



वर्तमान में यदि किसी व्यक्ति ने बिजली-पानी बिल, ओटीटी सब्सक्रिप्शन या कर्ज की ईएमआई चुकाने के लिए अलग-अलग यूपीआई ऐप पर ऑटो भुगतान सक्रिय किए हैं तो उसे हर बार उसी ऐप पर जाकर उसकी स्थिति जांचनी पड़ती है। नई सुविधा शुरू होने के बाद सभी ई-मैंडेट एक ही जगह दिखाई देंगे, चाहे उन्हें किसी भी यूपीआई ऐप के जरिए बनाया गया हो। बताया जा रहा है कि एनपीसीआई ने भुगतान सेवा प्रदाता कंपनियों को इसके लिए अपने नेटवर्क में जरूरी बदलाव करने का निर्देश दिया है।




दोहरे भुगतान से बचाव : इस बदलाव के बाद ग्राहकों को अपने सभी ऑटोपे भुगतान की जानकारी एक ही मंच पर मिल जाएगी। वे यह देख पाएंगे कि उनके कौन-कौन से ऑटो-पे भुगतान सक्रिय हैं और किस ऐप से रकम कट रही है। जरूरत पड़ने पर वे इन्हें किसी दूसरे ऐप पर ट्रांसफर कर सकेंगे। इससे वित्तीय प्रबंधन आसान होगा और गलती से दोहरी या अनजाने में होने वाली भुगतान से भी बचाव होगा।


उसी एप से भुगतान होगा


हालांकि, अगर ग्राहक कोई सब्सक्रिप्शन रद्द करना चाहते हैं या उसमें बदलाव करना चाहते हैं, तो उन्हें उसी ऐप पर जाना होगा, जिसके जरिए शुरू में उन्होंने ऑटो पेमेंट की सुविधा शुरू की थी। मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, यह फीचर ऐसा है कि सभी ऐप्स ई-मैंडेट की सूची तो दिखाएंगी, लेकिन लेनदेन के लिए उन्हें उसी यूपीआई ऐप पर भेज दिया जाएगा।


तेजी से बढ़ा ई-मैंडेट


यूपीआई ऑटोपे सुविधा का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में शीर्ष 10 बैंकों ने करीब 1.6 अरब ऑटोपे लेनदेन प्रोसेस किए, जबकि एक साल पहले यह संख्या 57.7 करोड़ थी। ऑटोपे का इस्तेमाल ईएमआई, बीमा प्रीमियम, एसआईपी, मोबाइल-बिजली बिल जैसे नियमित भुगतानों के लिए किया जाता है।


क्यों पड़ रही है जरूरत


ऑटोपे लेनदेन बढ़ने के साथ कई ग्राहकों को यह याद नहीं रहता कि उन्होंने किन-किन सेवाओं के लिए ऑटो भुगतान की अनुमति दे रखी है। कई बार खाते में पर्याप्त राशि न होने से भुगतान असफल हो जाते हैं। एनपीसीआई का मानना है कि यदि सभी ऑटोपे एक ही स्थान पर दिखेंगे तो ग्राहक उन्हें बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकेंगे।



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