पूरे सत्र चलेगा सतत आंतरिक मूल्यांकन
लखनऊ। विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में सिर्फ मिड टर्म परीक्षा से सतत आंतरिक मूल्यांकन नहीं होगा। पूरे शैक्षिक सत्र में कोर्स के साथ ही सतत आंतरिक मूल्यांकन भी चलेगा। शिक्षकों को हर महीने विद्यार्थियों का सर्वांगीण आंकलन करना होगा।
अभी ज्यादातर उच्च शिक्षण संस्थान छह महीने के सेमेस्टर में तीन-तीन महीने में मिड टर्म परीक्षाएं आयोजित कर आंतरिक मूल्यांकन कर छात्रों को अंक दे रहे हैं। सतत मूल्यांकन की प्रक्रिया लगातार की जानी है, जिससे विद्यार्थियों की कक्षाओं में उपस्थिति अनिवार्य हो सके। अभी मिड टर्म परीक्षा के 15 अंक और बाकी इंटरव्यू व प्रोजेक्ट के 15 अंक देकर सतत मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। बाकी 70 अंक की सेमेस्टर परीक्षा होती है और कुल 100 अंकों में हर विषय में मूल्यांकन किया जाता है। कई उच्च शिक्षण संस्थान तो यह भी नहीं कर रहे और इसके नाम पर खानापूरी की जा रही है। ऐसे में अब इस पर सख्ती किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
ऐसे करना होगा सतत आंतरिक मूल्यांकन
विद्यार्थियों का सतत आंतरिक मूल्यांकन शिक्षक क्लास टेस्ट, क्विज, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल, मौखिक परीक्षा, कक्षा में उपस्थिति, छात्र का व्यवहार और प्रेजेंटेशन के आधार पर अंकों को बांटकर होगा। जिससे छात्रों की रटने की आदत को कम करके उनका ज्ञान परखा जाएगा।
आपदा में रिजल्ट आसानी से तैयार हो सकेगा
महामारी व अन्य कोई आपदा आने पर परीक्षा परिणाम आसानी से तैयार हो सकेगा। विद्यार्थियों को पिछले वर्ष की परीक्षा के आधार पर औसत निकालकर अंक देने की नौबत नहीं आएगी। उसके पिछले महीने तक हुए सतत आंतरिक मूल्यांकन को देखकर परिणाम तैयार हो सकेगा।

