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Friday, June 12, 2026

जिला पंचायतों में आउटसोर्सिंग से होगी इंजीनियरों और वास्तुविदों की भर्ती

 जिला पंचायतों में आउटसोर्सिंग से होगी इंजीनियरों और वास्तुविदों की भर्ती

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की जिला पंचायतों में भवन निर्माण और विकास कार्यों को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत इंजीनियरों, वास्तुविदों (Architects) और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों की भर्ती Outsourcing के माध्यम से की जाएगी।



इस नई व्यवस्था से प्रदेश के 450 से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।


जिला पंचायतों में तैनात होगा तकनीकी स्टाफ

शासन द्वारा तैयार किए गए "उत्तर प्रदेश की जिला पंचायतों हेतु मॉडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां-2026" के मसौदे में इस व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार जिला पंचायतों में वास्तुविद, सिविल इंजीनियर, स्ट्रक्चरल इंजीनियर, नगर नियोजक (Town Planner), पर्यवेक्षक और लैंडस्केप वास्तुविद जैसे पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियां की जाएंगी।


इन कर्मचारियों का मानदेय संबंधित जिला पंचायतें अपने संसाधनों से वहन करेंगी।


ग्रामीण क्षेत्रों में आसान होगी भवन मानचित्र स्वीकृति

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में Building Map Approval की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता से भवन निर्माण से जुड़े प्रस्तावों की जांच और स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।


इन पदों के लिए तय की गई योग्यता

प्रस्तावित नियमों के अनुसार:


वास्तुविद (Architect)

वास्तुकला परिषद (Council of Architecture) में पंजीकरण अनिवार्य।


संबंधित विषय में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता आवश्यक।


सिविल इंजीनियर

मान्यता प्राप्त संस्थान से Civil Engineering में Degree अनिवार्य।


स्ट्रक्चरल इंजीनियर

Civil Engineering में Degree के साथ कम से कम 3 वर्ष का अनुभव आवश्यक।


पर्यवेक्षण के लिए सिविल या आर्किटेक्चर इंजीनियरिंग में 5 वर्ष का अनुभव जरूरी।


नगर नियोजक (Town Planner)

Town and Country Planning में Degree।


ITPI (Institute of Town Planners India) की सदस्यता अनिवार्य।


लैंडस्केप वास्तुविद

संबंधित विषय में स्नातक या स्नातकोत्तर योग्यता आवश्यक।


जल्द लागू हो सकती हैं नई उपविधियां

शासन को प्रस्तावित उपविधियों पर विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं। आवश्यक संशोधनों के बाद मसौदे को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है।


उपविधियों को मंजूरी मिलने के बाद जिला पंचायतें अपनी बोर्ड बैठकों में इन्हें अनुमोदित करेंगी। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण और मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक तकनीकी, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।


रोजगार के नए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से एक ओर जिला पंचायतों में तकनीकी कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

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