नौकरी की उम्मीदें धुंधली, डीएलएड से पीछे हट रहे छात्र
वर्ष 2024 में 1.91 लाख अभ्यर्थियों ने कराया था पंजीकरण, वर्ष 2025 में 86 हजार से भी कम रह गई संख्या
प्रयागराज। प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में लंबे अंतराल और सीमित रोजगार अवसरों का असर अब शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों पर भी दिखाई देने लगा है। डीएलएड जैसे पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थियों की रुचि लगातार घट रही है।
स्थिति यह है कि जिन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कभी भारी प्रतिस्पर्धा होती थी, वहां अब बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने लगी हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 3,046 निजी कॉलेजों और 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में डीएलएड की लगभग 2.39 लाख सीटें हैं। वर्ष 2024 में जहां करीब 1.91 लाख अभ्यर्थियों ने डीएलएड प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण कराया था, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 86 हजार से भी कम रह गई।
वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 15 जून से शुरू होनी है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी लंबे समय तक भर्ती न निकलने से छात्रों का भरोसा कम हुआ है। प्रदेश में बीएड, डीएलएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों से जुड़े अभ्यर्थियों की संख्या 28 से 30 लाख के बीच बताई जाती है, जो विभिन्न शिक्षक भर्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
वर्ष 2017 में 72,825 और वर्ष 2019 में लगभग 69 हजार सहायक अध्यापक पदों की भर्ती से प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को अवसर मिला था, लेकिन इसके बाद नई भर्तियों का इंतजार लगातार लंबा होता गया। प्रतियोगिता बढ़ी, अवसर सीमित हुए।
अभ्यर्थी और संगठन की पीड़ा
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि प्रदेश में प्रशिक्षित करीब 30 लाख छात्र रोजगार के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं को नियमित रूप से जारी रखना जरूरी है। वहीं प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधि शीतला प्रसाद ओझा का कहना है कि लंबे समय से पर्याप्त संख्या में भर्तियां न होने के कारण डीएलएड सहित अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थियों की रुचि प्रभावित हुई है।
वर्ष 2019 की शिक्षक भर्ती में लगभग 15 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। वर्तमान में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के लिए भी लगभग 20 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं।
