फीस प्रतिपूर्ति की वसूली बन गई गले की फांस
लखनऊ। पिछले सत्र में सामान्य वर्ग के छात्रों को ज्यादा दी गई फीस प्रतिपूर्ति रकम की वसूली समाज कल्याण विभाग के गले की फांस बन गई है। करीब ढाई हजार छात्र-छात्राओं को तय मानक से ज्यादा फीस की प्रतिपूर्ति की गई। शासन ने ज्यादा दी गई रकम वसूलने के आदेश दिए, लेकिन अभी तक पूरी रकम वापस नहीं हो पाई। शासन ने समाज कल्याण निदेशालय को दोबारा पत्र जारी कर पूछा है कि कितनी रकम वसूल की जा सकी है।
समाज कल्याण विभाग समान्य वर्ग तथा अनुसूचित जाति, जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, फीस प्रतिपूर्ति करता है। अनुसूचित जाति जनजाति के विद्यार्थियों की पूरी फीस वापस की जाती है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए चार श्रेणियां बनाई गई हैं। बीटेक, एमबीबीएस, पीएचडी या ऐसी ही उच्च शिक्षा ग्रहण करने वालों को अधिकतम 50 हजार, एमए, एमएससी, एमकाम, फार्मेसी, नर्सिंग में 30 हजार, बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे पाठ्यक्रमों में 20 हजार और कक्षा 11 व 12 के बच्चों को अधिकतम 10 हजार की फीस प्रतिपूर्ति की जा सकती है। तय सीमा से फीस कम है तो उतना ही वापस किया जाएगा। भुगतान करते वक्त यह नहीं देखा गया कि समान्य वर्ग के छात्रों को कितनी फीस प्रतिपूर्ति की जानी है। करीब ढाई हजार को 4 करोड़ रुपये ज्यादा भुगतान कर दिए गए। यह भुगतान जनवरी 2026 में किए गए। इनमें ज्यादातर बीएड के छात्र थे। शासन ने समाज कल्याण निदेशालय से जवाब मांगा तो जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि भुगतान के वक्त कैप न लगा होने के कारण यह गड़बड़ी हुई है।

