बिहार में सरकारी आदेश के बावजूद शिक्षकों के वेतन भुगतान में देरी, जिम्मेदार कौन?
बिहार में हजारों नियोजित और नियमित शिक्षक पिछले तीन माह से वेतन के इंतजार में हैं। शिक्षा विभाग की ओर से समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू किए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों को वेतन नहीं मिल सका है। इसके कारण उनके सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। परिवार का खर्च चलाने से लेकर बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक प्रभावित हो रहा है।
एसओपी लागू, फिर भी भुगतान में देरी
शिक्षा विभाग ने पहली से 12वीं कक्षा तक के शिक्षकों के नियमित वेतन भुगतान के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के माध्यम से विस्तृत एसओपी जारी किया था।
इसका उद्देश्य समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना था। बावजूद इसके तीन माह से नियोजित और कुछ नियमित शिक्षकों का वेतन लंबित है। इससे विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
शिक्षकों के सामने गहराया आर्थिक संकट
नगर प्राथमिक शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष संजीव कुमार ठाकुर ने कहा कि लगातार वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षकों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है।
कई शिक्षकों को आवश्यक इलाज नहीं मिल पाया, जिसके गंभीर परिणाम सामने आए। वहीं कुछ महिला शिक्षकों को पारिवारिक संकटों का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि नियमित आय नहीं होने से कई परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।
बैंक ऋण की किस्त चुकाने में परेशानी
अधिकांश शिक्षकों ने विभिन्न जरूरतों के लिए बैंकों से ऋण ले रखा है। समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण वे मासिक किस्त जमा नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते बैंक लगातार वसूली का दबाव बना रहे हैं। कई शिक्षक मानसिक तनाव और प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वेतन भुगतान में हो रही देरी का सीधा असर उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन पर पड़ रहा है।
आवंटन नहीं मिलने का दिया जा रहा हवाला
शिक्षकों के अनुसार जब भी इस संबंध में अधिकारियों से संपर्क किया जाता है, तो जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) द्वारा आवंटन नहीं मिलने की बात कही जाती है। वहीं शिक्षकों का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित व्यवस्था के बावजू
शिक्षा मंत्री और निदेशक को भेजे गए पत्र
संजीव कुमार ठाकुर ने बताया कि इस मामले को लेकर प्राथमिक शिक्षा निदेशक और शिक्षा मंत्री को कई बार ई-मेल और पत्र भेजे गए हैं। शिक्षकों ने जल्द वेतन भुगतान की मांग की है। हालांकि अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।
'संचिकाओं में धूल फांक रही एसओपी'
शिक्षक नेताओं का आरोप है कि समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई एसओपी केवल कागजों तक सीमित रह गई है। उनका कहना है कि यदि नियमों का सही तरीके से पालन होता, तो शिक्षकों को महीनों तक वेतन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता। शिक्षकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर लंबित वेतन भुगतान कराने की मांग की है।

