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Sunday, June 21, 2026

प्राथमिक में दो और उच्च प्राथमिक स्कूलों में न्यूनतम तीन शिक्षक होंगे: वरिष्ठ अतिरिक्त शिक्षक भेजे जाएंगे दूसरे स्कूल,जिलों में सूची तैयार कर समायोजन शुरू

 प्राथमिक में दो और उच्च प्राथमिक स्कूलों में न्यूनतम तीन शिक्षक होंगे: वरिष्ठ अतिरिक्त शिक्षक भेजे जाएंगे दूसरे स्कूल,जिलों में सूची तैयार कर समायोजन शुरू

लखनऊ,। एक ही परिषदीय स्कूल में सालों से जमे रहने वाले सबसे वरिष्ठ शिक्षक को अतिरिक्त मानकर दूसरे स्कूलों में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षकों के समायोजन के लिए परिषदीय प्राथमिक स्कूल में न्यूनतम दो व उच्च प्राथमिक स्कूल में तीन शिक्षकों का मानक तय किया गया है। अभी कुछ स्कूलों में एक ही शिक्षक हैं, तो प्राइम स्थानों वाले स्कूलों में छात्र संख्या न होते हुए भी शिक्षकों की भरमार है। इसीलिए न्यूनतम दो व तीन शिक्षकों का मानक तय किया गया है, जिससे सभी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक हो जाएं।



इस व्यवस्था से एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे स्कूलों में और शिक्षकों के आने से पढ़ाई के स्तर में सुधार हो सकेगा। दो वर्ष पहले सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन तब सबसे जूनियर शिक्षक को सरप्लस मानकर उसका समायोजन शुरू किया गया। इसके खिलाफ जूनियर शिक्षक कोर्ट चले गए थे और प्रक्रिया रोक दी गई। क्योंकि ऐसे तो जूनियर शिक्षकों का बार-बार स्थानांतरण होता रहता और वरिष्ठ शिक्षक एक ही स्कूल में जमे रहते हैं। न्यायालय ने अब प्राथमिक स्कूलों में न्यूनतम दो और उच्च प्राथमिक स्कूलों में तीन शिक्षक तैनात करने के आदेश दिए हैं। सबसे वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस मानकर उसका समायोजन दूसरे स्कूल में किया जाएगा।




प्रत्येक जिले में सरप्लस शिक्षकों की सूची तैयार कर उन्हें दूसरे विद्यालय में समायोजित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिससे गर्मियों की छुट्टियों के बाद खुल रहे विद्यालयों में पढ़ाई बेहतर ढंग से हो सकेगी। उप्र बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि इस कदम से स्कूलों में पढ़ाई बेहतर ढंग से हो सकेगी।




सड़क किनारे वाले स्कूलों में ज्यादा शिक्षक




ज्यादातर शिक्षक ऐसे विद्यालय जहां पर आसानी से परिवहन सुविधा है और खासकर जो सड़क के किनारे स्थित हैं, वहां पर अपनी तैनाती के लिए जोर अजमाइश करते हैं। जोर-जुगाड़ कर वहां तैनाती पा लेते हैं। सड़क किनारे के स्कूलों में छात्र भले ही कम हो, लेकिन शिक्षक अधिक रहते हैं। अब यहां से वरिष्ठ शिक्षकों को दूर-दराज के उन विद्यालयों में भेजा जाएगा, जहां एक शिक्षक ही तैनात है।




संवर्ग एक हो तो मिले राहत




शहरी क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों की हालत काफी खराब है। वर्ष 1972 से बेसिक शिक्षा परिषद बनने से ही ग्रामीण शिक्षकों व शहर शिक्षकों का अलग-अलग संवर्ग है। पहले ग्रामीण शिक्षकों को शहर के विद्यालय का विकल्प देकर यहां स्थानांतरित कर दिया जाता था, लेकिन वर्ष 2012 के बाद से यह प्रक्रिया बंद है। नतीजा लखनऊ में ही शहरी क्षेत्र में 55 विद्यालय ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं हैं। यहां शिक्षामित्रों के सहारे या फिर उनके न होने पर दूसरे विद्यालय के शिक्षक को यहां अटैच कर काम चलाया जा रहा है।




एक-एक शिक्षक के पास तीन-तीन स्कूल का चार्ज है। बाकी शहरों में भी यही हालत है।



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