सक्षमता परीक्षा पास शिक्षकों को भी सीटीईटी या टीईटी पास करना जरूरी, नहीं तो जाएगी नौकरी
अब शिक्षकों को नौकरी बचाने के लिए सीटीईटी या टीईटी पास करना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर उनकी नौकरी खत्म हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षकों सीटीईटी या टीईटी पास करने का निर्देश दिया है। बिहार के लगभग 2.60 लाख शिक्षक इस वक्त 'रडार' पर हैं, जिन्होंने अब तक ये दोनों परीक्षाएं पास नहीं की हैं।
जिन शिक्षकों की उम्र 55 वर्ष से अधिक है, उन्हें नौकरी से तो नहीं निकाला जाएगा, लेकिन उनकी तरक्की के रास्ते बंद हो जाएंगे। बिहार के ऐसे 60 हजार शिक्षकों को न तो प्रधानाध्यापक बनने का मौका मिलेगा और न ही अनुभव का लाभ। उन्हें नौकरी बचाने के लिए मिली छूट उनके करियर की ग्रोथ को फ्रीज कर देगी। 15 वर्ष पहले ही शिक्षकों के लिए टीईटी और सीटीईटी परीक्षा की वैधता अनिवार्य कर दिया गया था। 29 जुलाई 2011 को राष्ट्रीय अध्यापक
शिक्षा परिषद ने स्पष्ट किया था कि सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास करना अनिवार्य है। यह शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता है। इसके बाद विभिन्न राज्यों में टीईटी के साथ ही सीटीईटी की परीक्षा शुरु की गई थी। टीईटी परीक्षा पास होने के बाद
अभ्यर्थी केवल अपने स्कूल में ही नियुक्त हो सकते है। जबकि, सीटीईटी परीक्षा पास होने के बाद वे देश के सभी सरकारी स्कूलों में नियुक्त हो सकते है। सीटीईटी परीक्षा पास होने के बाद अभ्यर्थी अपने राज्यों में स्थित सरकारी स्कूलों के साथ ही केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, दिल्ली स्कूल सहित अन्य स्कूलों में नियुक्ति हो सकती है। शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि नियुक्तियां नियमों के मुताबिक ही होंगी। दूसरी तरफ, बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के सचिव आनंद मिश्रा ने इसे गलत ठहराया है। उनका कहना है कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर नए नियम थोपना अन्याय है।

