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Tuesday, July 14, 2026

पति की आय का 25% गुजारा भत्ता तय करना जरूरी नहीं

 पति की आय का 25% गुजारा भत्ता तय करना जरूरी नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि पत्नी को पति की नेट सैलरी का 25 प्रतिशत गुज़ारा-भत्ता देने का जो पैमाना अक्सर इस्तेमाल किया जाता है, वह सिर्फ एक सामान्य गाइडलाइन है, न कि कोई अनिवार्य नियम। न्यायमूर्ति अचल सचदेव ने पति पत्नी दोनों की याचिका पर सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि न्यायालय के पास हर मामले के तथ्यों के आधार पर कम या ज़्यादा भत्ता तय करने का अधिकार है। यह भी कहा कि गुजारा-भत्ता तय करने के लिए नेट इनकम का मतलब आम तौर पर जरूरी कटौतियों व टैक्स के बाद बची इनकम से होता है, न कि ग्रॉस सैलरी से।






पत्नी ने कानपुर देहात की फैमिली कोर्ट द्वारा तय 12 हजार रुपये के मासिक गुज़ारे-भत्ते को बढ़ाने की मांग की थी और पति ने उसी फैसले को चुनौती दी थी। यह बात मानी गई कि पति ने पत्नी के ख़िलाफ़ तलाक़ की अर्ज़ी दाखिल की और फ़ैसला उसके पक्ष में आया। इस पर हाईकोर्ट ने दोहराया कि सिर्फ़ तलाक़ का फ़ैसला (डिक्री) आने से ही कोई कानूनी रूप से ब्याही पत्नी गुज़ारा-भत्ता पाने के अधिकार से वंचित नहीं हो जाती, बशर्ते वह अपना गुज़ारा करने में असमर्थ हो और उसने दोबारा शादी न की हो या वह व्यभिचार में न रह रही हो। कोर्ट ने कहा कि गुज़ारा-भत्ते का मकसद यह पक्का करना है कि पत्नी सम्मान के साथ जी सके, न कि सिर्फ़ ज़िंदा रहे। इस मामले में रिकॉर्ड में यह बात आई कि पत्नी के पास आय का कोई पर्याप्त ज़रिया नहीं था और वह अपना गुज़ारा करने में असमर्थ थी जबकि पति के पास आय का पर्याप्त ज़रिया था। पत्नी इसलिए गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार थी क्योंकि तलाक़ के बाद उसने दोबारा शादी नहीं की। अपने अधिकार क्षेत्र के बारे में कोर्ट ने कहा कि निगरानी अदालतें आमतौर पर गुज़ारा-भत्ते की रकम को बढ़ा या घटा नहीं सकती। भले ही ट्रायल कोर्ट ने बहुत कम रकम तय की हो, हाईकोर्ट निगरानी याचिका में उसे बढ़ा नहीं सकता और जोड़ा कि निगरानी अदालतों की शक्ति सुपरवाइजरी होती है, न कि अपीलीय। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दखल तब ज़रूरी हो जाता है, जब ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष गलत या तर्कहीन हों, जब ज़रूरी सबूतों को नज़रअंदाज़ किया गया हो, या जब स्थापित सिद्धांतों को गलत तरीके से लागू किया गया हो, जिससे गंभीर अन्याय या परेशानी हुई हो। कोर्ट ने पाया कि पति की कुल मासिक तनख्वाह 86 हजार 674 रुपये थी, जिसमें 67 हजार 043 उसके बैंक अकाउंट में जमा हो रहे थे।



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