अनावश्यक देरी से विफल हो जाता है अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य
हाईकोर्ट ने दस साल से कानूनी लड़ाई लड़ रही महिला के मामले में दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति में अनावश्यक देरी से पीड़ित परिवार को राहत देने का उद्देश्य विफल हो जाता है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने कानपुर नगर निगम के अधिकारियों को याची कामायनी सिंह की नियुक्ति पर पांच अगस्त तक फैसला लेने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि तय समय में मामले का निस्तारण नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को अदालत में व्यक्तिगत हलफनामे संग पेश होना होगा। याची ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए 2015 में आवेदन किया था। याची की मांग 24 जनवरी 2025 को खारिज कर दी गई थी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर कोर्ट ने नगर निगम के आदेश को निरस्त कर मामले पर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया था। अधिकारियों ने दोबारा लगभग वही आदेश पारित कर दिया जिसे पहले ही कोर्ट रद्द कर चुका था। लिहाजा, याची ने फिर से हाईकोर्ट का रुख किया।
अधिकारियों की लापरवाह कार्यशैली से खफा कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह सामान्य भर्ती प्रक्रिया नहीं बल्कि मानवीय आधार पर दी जाने वाली राहत है। ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी या कोर्ट के आदेशों की अनदेखी इस उद्देश्य को ही समाप्त कर देती है।

