इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला स्तरीय पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने के बावजूद छह महीने तक पुरस्कार राशि के लिए भटकने वाली छात्रा दीक्षा मिश्रा के अधिकारियों द्वारा लापरवाही पूर्वक अमान्य हो चुका चेक तैयार करने पर नाराजगी जताई है।
न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया एवं न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने छात्रा की अधिवक्ता नेहा पांडेय व पीयूष पांडेय को सुनने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक प्रयागराज को 20 जुलाई को वैध चेक के साथ व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने डीआईओएस से पूछा है कि इस घोर लापरवाही के लिए उन पर भारी जुर्माना क्यों न लगाया जाए।
नैनी की रहने वाली बीए की छात्रा दीक्षा मिश्रा ने सितंबर 2025 में आयोजित प्रतियोगिता में 51 हजार रुपये का इनाम जीता था। फंड जारी होने के बावजूद अधिकारियों ने उसे राशि नहीं दी, जिस पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट के आदेश पर जब अधिकारियों ने चेक की जानकारी दी तो पता चला कि जो चेक (एक जून को बना) दिया जा रहा था, वह 30 जून 2026 को ही लैप्स हो चुका था। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए डीआईओएस को तलब कर लिया है।
