शिक्षक भर्ती मुकदमों के निस्तारण को मांगी समयसीमा, अलग बने व्यवस्था
प्रयागराज। बेसिक शिक्षा विभाग की वर्ष 2019 की 69,000 पदों की सहायक शिक्षक भर्ती और एडेड माध्यमिक विद्यालयों की वर्ष 2013 की प्रधानाचार्य भर्ती से जुड़े मुकदमों के लंबे समय से लंबित रहने पर शिक्षक संगठनों ने सरकार से इनके शीघ्र निस्तारण की मांग की है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि भर्ती से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए अलग न्यायालय/व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि वर्षों से लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण हो सके। उनका कहना है कि एक भर्ती के बाद दूसरी भर्ती आने में करीब 12 वर्ष लगने से प्रतियोगी अभ्यर्थियों को भी परेशानी होती है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले
69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद समेत अन्य मामलों की सुनवाई लंबे समय से चल रही है। वहीं वर्ष 2013 की प्रधानाचार्य भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों से जुड़े मामलों में भी न्यायिक प्रक्रिया के कारण नियुक्तियों और कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि बाल न्यायालय, राजस्व न्यायालय और श्रम न्यायालय की तर्ज पर शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था विकसित की जाए। इससे भर्ती और पदोन्नति से संबंधित विवादों का समयबद्ध समाधान संभव हो सकेगा।
नई मांगें भी उठीं
शिक्षक संगठनों की ओर से मांग की गई है कि—
बाल न्यायालय और राजस्व न्यायालय की तर्ज पर शिक्षक भर्ती मुकदमों के लिए अलग न्यायालय बनाया जाए।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित 69000 शिक्षक भर्ती एवं प्रधानाचार्य भर्ती से जुड़े मामलों के निस्तारण की समयसीमा तय की जाए।
नीट पेपर लीक की तर्ज पर शिक्षक भर्ती मामलों के लिए भी विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाए।
भर्ती प्रक्रिया के दौरान विवाद उत्पन्न होने पर अभ्यर्थियों की आयु और भविष्य को ध्यान में रखते हुए अलग व्यवस्था की जाए।
शिक्षकों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। ऐसे में सरकार और न्यायपालिका को इन मामलों के त्वरित और समयबद्ध निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए।
