दो बच्चों के बीच दो साल का अंतर जरूरी नहीं, महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत
प्रसूति अवकाश के नियम में शासन ने किया महत्वपूर्ण संशोधन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। शासन ने प्रसूति अवकाश से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए दो बच्चों के बीच दो साल का अनिवार्य अंतर रखने की शर्त समाप्त कर दी है।
वित्तीय नियम संग्रह खंड-2 भाग-2 के तहत प्रसूति अवकाश से संबंधित नियम में संशोधन करते हुए शासन ने 2 सितंबर को शासनादेश जारी किया है। संशोधन के बाद अब महिला सरकारी कर्मचारियों को अगली बार प्रसूति अवकाश लेने के लिए पिछले प्रसूति अवकाश की समाप्ति से दो वर्ष की अवधि पूरी होने का इंतजार नहीं करना होगा।
सेवा अवधि में दो बार 180 दिन तक अवकाश
संशोधित प्रावधान के अनुसार महिला सरकारी कर्मचारी को पूरी सेवा अवधि में अधिकतम दो बार प्रसूति अवकाश मिलेगा और प्रत्येक बार अधिकतम 180 दिन का प्रावधान जारी रहेगा।
पहले नियम में यह शर्त थी कि पिछले प्रसूति अवकाश की समाप्ति की तारीख से कम से कम दो वर्ष की अवधि बीतने के बाद ही अगला प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। अब इस अनिवार्य दो वर्ष की अवधि वाली शर्त को हटा दिया गया है।
मातृत्व लाभ अधिनियम के अनुरूप बदलाव
शासनादेश में प्रसूति अवकाश नियम में दो वर्ष की अवधि से संबंधित प्रतिबंध/परंतुक को Maternity Benefit Act, 1961 के नियम-27 के अनुरूप करने की बात कही गई है। शासन का उद्देश्य महिला सरकारी कर्मचारियों को प्रसूति के दौरान आने वाली कठिनाइयों को कम करना और उन्हें आवश्यक अवकाश सुविधा उपलब्ध कराना है।
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि संशोधन का अर्थ प्रसूति अवकाश की संख्या या अवधि बढ़ाना नहीं है। सेवा अवधि में अधिकतम दो बार प्रसूति अवकाश और प्रत्येक बार अधिकतम 180 दिन का प्रावधान पहले की तरह लागू रहेगा।
संशोधित शासनादेश जारी होने की तिथि से प्रभावी होगा। साथ ही, आवश्यकता के अनुसार प्रसूति अवकाश से संबंधित नियमों में समय-समय पर संशोधन किया जा सकेगा।
