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Friday, September 11, 2026

आसान नहीं पक्की नौकरी देने की राह

आसान नहीं पक्की नौकरी देने की राह

लखनऊ, । शिक्षा मित्रों व संविदा कर्मियों की तरह यूपी में आउटसोर्स कर्मियों को भले ही राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन इनकों को पक्की नौकरी देने की राह आसान नहीं होगी।



विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार ने उनके हितों की रक्षा के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम बनाया है, तो समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार बनते ही आउटसोर्स व्यवस्था खत्म की जाएगी और पक्की नौकरी दी जाएगी। शासन स्तर पर जुटाए गए आंकड़े के मुताबिक यूपी में इसकी संख्या दो लाख से आसपास बताई जा रही है। इसमें सबसे अधिक स्थानीय निकायों और बिजली विभाग में आउटसोर्स कर्मी लगे हैं।







यूपी में वर्ष 2000 में संविदा पर भर्ती व्यवस्था समाप्त होने के साथ ही एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्स कर्मियों के रखने की प्रथा शुरू हुई। सभी विभागों में आज एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्स पर कार्मियों को रखा गया है। मौजूदा समय 9000 से लेकर एक लाख रुपये तक एजेंसियों के माध्यम से रखे कार्मियों को मानेदय दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने इनके हितों की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम बनाया है।




सरकार ने योग्यता के आधार पर उनका मानदेय तय किया है। एकाउंटेंट 25 हजार, डाटा इंट्री आपरेटर 18500, समूह ग 15000 और चतुर्थ श्रेणी 15 हजार रुपये मानदेय तय किया गया है। यूपी में वर्ष 2000 के पहले संविदा पर रखे गए कर्मियों को स्थाई करने का फैसला किया गया था, लेकिन अभी भी कई विभागों में इनका स्थायीकरण कानूनी पेंच में फंसा हुआ है।

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