भदोही के सुरियावां ब्लाक क्षेत्र के महजूदा गांव में मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया। स्कूल में चली रही प्रार्थना सभा के दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय का छत भरभरा कर गिर पड़ा। उस पर चढ़े प्रधान बाल-बाल बच गए। कमरे में बच्चे होते तो फिर हादसे की तस्वीर को समझना मुश्किल था। उधर, बीएसए बीएन पांडेय ने बीईओ से बुधवार को स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट देने की मांग की है।
भदोही के सुरियावां ब्लाक क्षेत्र के महजूदा गांव में मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया। स्कूल में चली रही प्रार्थना सभा के दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय का छत भरभरा कर गिर पड़ा। उस पर चढ़े प्रधान बाल-बाल बच गए। कमरे में बच्चे होते तो फिर हादसे की तस्वीर को समझना मुश्किल था। उधर, बीएसए बीएन पांडेय ने बीईओ से बुधवार को स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट देने की मांग की है।
उक्त गांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय का डेढ़ दशक पहले निर्माण कराया गया था। पांच कमरों वालों विद्यालय में सौ से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। छत जर्जर होने के साथ ही गत दिनों बरसात के बाद सीमेंट ने छोड़ दिया था। प्रधान राजमणि पांडेय ने मामले से अधिकारियों को अवगत कराया था। जिस पर डीपीआरओ बालेशधर द्विवेदी ने छतों का बारी-बारी से निर्माण कराने का आदेश दिया था। इसी कड़ी में मंगलवार को मजदूरों के साथ प्रधान स्कूल पहुंचे। उस दौरान सुबह प्रार्थना चल रही थी। उसके बाद बच्चों को कमरों में बैठना था।
जैसे ही प्रधान छत पर चढ़े वह भरभरा कर गिर पड़ा। जमीन पर कूदकर उन्होंने खुद की जान बचाई। उसके बाद विद्यालय में हड़कंप मच गया। खबर लगते ही अभिभावक भी स्कूल पहुंच गए और बच्चों को कमरों में जाने से मना कर दिया। जिसके बाद गुरुजनों ने उन्हें खुले आसमान के नीचे बाहर ही पढ़ाने का काम किया। इस बाबत बीएसए बीएन पांडेय का कहना था कि मामले की जानकारी है। खंड शिक्षाधिकारी सुरियावां से रिपोर्ट बुधवार तक मांगी गई है। उसके बाद आगे कदम उठाया जाएगा।
यह रहा छत टूटने का कारण
डेढ़ दशक पूर्व बने स्कूल में मानक की जमकर अनदेखी की गई थी। डेढ़ इंच तक छत को तोड़कर मरम्मत कराया जाना था। लेकिन वहां पहुंचते ही वह गिर पड़ी। इतना ही नहीं, अधिकांश स्थानों पर प्लास्टर भी नहीं कराया गया था। आलम यह है कि कमरों में छत में ढाला गया लोहा भी नजर आ रहा है। बता दें कि अधिकारियों के आदेश पर गत दिनों जेई ने आकर जांच की थी। उसकेबाद दोबारा छत बनाने की बात कही थी। बावजूद इसके बच्चों को उसी में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था।

