वाराणसी। कोविड काल के बाद विद्यालय के ताले खुल चुके है और स्कूलों में पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। लंबे अरसे बाद खुले स्कूलों के कारण ह्यअक्षरह व ह्यअंकल ज्ञान भूल चुके बच्चों के लिए बेसिक विभाग सहज वातावरण बनाने में जुटा हुआ है। विभाग ने परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को स्कूलों में खेल गतिविधियां कराने का निर्देश दिया है। जिससे कि वे शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बन सके। वहीं जो बच्चों अभी भी स्कूल नहीं आ रहे हैं, उनके घर-घर जाकर काउसलिंग करने का निर्देश दिया है। दूसरी तरफ बच्चों में नेतृत्व विकास के लिए सभी स्कूलों के हेडमास्टरों को प्रोजेक्ट तैयार करने का भी निर्देश है। जिसकी आखिरी डेडलाइन 30 सितंबर निर्धारित है।
दरअसल कोरोना की पहली और दूसरी लहर के कारण लगभग डेढ़ साल तक स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य ठप रहा है। महामारी का प्रकोप कम होने के बाद अब प्राइमरी के लगायत उच्च शैक्षणिक संस्थान खुल चुके है और स्कूलों की खोई रौनक एक बार फिर से लौट आई है। लेकिन अभी भी प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम मिल रही है। जिसपर बीते दिनों आपके अखबार 'जनसंदेश टाइम्स' ने 'खुले स्कूल पर बच्चों की उपस्थिति उम्मीद से कम हेडलाइन के साथ खबर भी प्रकाशित किया था। जिसमें आंकड़ों के आधार पर बताया गया था कि स्कूल में बच्चों की उपस्थिति अभी भी अपेक्षा अनुरूप नहीं है।
स्कूलों में दो घंटे पढ़ाई फिर खेलकूद
स्कूलों में बच्चों की अपेक्षानुरूप उपस्थिति न होने से विद्यालय प्रबंधन भी चिंता में है। ऐसे में बेसिक विभाग ने स्कूल नहीं आ रहे बच्चों के घर घर जाकर काउसलिंग करने का निर्देश दिया है। शिक्षक बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे। जिससे कि उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा में जोड़ा जा सके। दूसरी तरफ बच्चों पर अचानक पढ़ाई का बोझ न बढ़े इसके लिए पांचवीं तक की कक्षाओं में एक-एक घंटे हिन्दी और गणित की पढ़ाई कराने का निर्देश है। शेष समय बच्चों के बीच खेलकूद गतिविधियां कराई जायेगी।

