उत्तर प्रदेश में पहली बार निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत युवाओं को योग्यता के आधार पर रिकॉर्ड सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में मिली हैं। सरकारी, •अर्द्धसरकारी हो या निजी क्षेत्र, युवाओं के लिए रोजगार के कई द्वार खुले हैं। हर हाथ को काम मिला है।
बीते साढ़े चार वर्ष के दौरान रिकॉर्ड सरकारी नौकरी देने के मामले में उत्तर प्रदेश, देश में अव्वल है। रिक्त पदों पर अभियान चलाकर भर्तियां करने की प्रक्रिया गतिमान है। मुख्यमंत्री कार्यालय से सभी भर्तियों पर सीधी नजर रखी जा रही है, जिससे सभी भर्तियों की प्रक्रिया समय से पूरी हो रही हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्ष 2017 से अब तक विभिन्न भर्ती आयोगों, चयन बोड़ों व विभागों में 7.71,454 रिक्त पदों पर भर्तियां की हैं। नियमित सरकारी नौकरी के साथ ही विभिन्न विभागों में संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से भी नौकरियां दी गई हैं। इनमें से 4 लाख 50 हजार 251 पदों पर नियमित सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इनमें सबसे अधिक भर्तियां पुलिस विभाग में 1,43,445 और बेसिक शिक्षा विभाग में 1,25,987 युवाओं को नौकरियां दी गई हैं। सरकारी नौकरियां देने का यह आंकड़ा पूर्व की राज्य सरकारों की तुलना में सर्वाधिक है।
प्रधानाध्यापक की चयन प्रक्रिया
बेसिक शिक्षा परिषद के जूनियर हाईस्कूलों में हेडमास्टर के रिक्त पदों पर 40 फीसदी पदों पर भर्ती विभागीय परीक्षा से एवं 60 फीसदी पदों पर विभिन्न मानकों पर प्रोन्नति करके नियुक्ति दी जाएगी। इस प्रक्रिया को पूरा करने की समय सीमा दिसम्बर 2021 निर्धारित है। प्रदेश के 1.59 लाख प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के 52,317 पद रिक्त हैं। इनमें 30,426 पद जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापकों के हैं।
मेडिकल कॉलेजों में 9,600 भर्तियां
एक जनपद-एक मेडिकल कॉलेज अभियान के तहत 16 असेवित जनपदों में स्थापित किए जा रहे मेडिकल कॉलेज में 9,600 से अधिक भर्तियां की जाएंगी। यह वो जनपद हैं, जहां फिलहाल कोई सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज नहीं है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत बनने वाले इन मेडिकल कॉलेज से प्रतिवर्ष 1,600 नये चिकित्सक राज्य को मिलेंगे। इन मेडिकल कॉलेज के शुरू होने से पांच से छह हजार बेड की संख्या प्रदेश के अस्पतालों में बढ़ेगी।
एक लाख से अधिक लोगों को मानदेय पर रोजगार
उत्तर प्रदेश सरकार ने जहां सरकारी नौकरी देने का पिटारा खोला है, वहीं मानदेय पर रोजगार देने की व्यवस्था भी कराई है। यूपी में एक लाख से अधिक लोगों को मानदेय पर नौकरी देने की तैयारी है। इसका मकसद अर्द्धकुशल श्रमिक स्तर के लोगों को सीधे रोजगार से जोड़ना है। प्रदेश के शिक्षित, प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित युवाओं के साथ ही कोविड संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान अन्य प्रदेशों से बड़ी संख्या में वापस आये प्रवासी श्रमिकों को भी राज्य सरकार ने रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये हैं। 'मिशन रोजगार' अभियान के अन्तर्गत शिक्षित युवाओं, महिलाओं और •अर्द्धकुशल श्रमिकों को उनके गांव में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए कई विभागों में मानदेय पर भर्तियां शुरू की गई हैं। पिछले दिनों हर ग्राम पंचायत में एक पंचायत सहायक कम अकाउंटेंट नियुक्त करने का फैसला किया गया। है। प्रत्येक पंचायत सचिव को छह हजार रुपये महीने मानदेय मिलेगा। इसकी चयन प्रक्रिया गतिमान है। लिहाजा वर्तमान वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले ही गांवों में 58 हजार से अधिक युवाओं को मानदेय पर रोजगार मिल जाएगा।
"उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी में मेरिट के आधार पर योग्यता व क्षमता के अनुसार चयन किया जा रहा है। राज्य में चयन एवं पोस्टिंग की प्रक्रिया बिना सिफारिश के हो रही है। वर्ष 2017 से पूर्व की विसंगतियों को समाप्त करते हुए ईमानदार, स्वच्छ, पारदर्शी व्यवस्था से जोड़ने का कार्य हो रहा है।"
योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
राज्य की आधी आबादी को न केवल रोजगार और स्वरोजगार से संबंधित नये अवसरों की जानकारी दी जा रही है बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित किया जा रहा है जिससे महिलाएं आर्थिक धरातल पर मजबूती से अपने पैर जमा रही हैं।
पुलिस भर्ती में प्राथमिकता
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुई पुलिस भर्ती में 20 फीसदी पदों पर महिला उम्मीदवारों की नियुक्ति की गई है। सरकार के इस सराहनीय कदम से पुलिस प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, जिससे आम महिलाएं खुलकर अपनी समस्यायें पुलिस से साझा कर रही हैं। महिलाओं में अब असुरक्षा और भय का भाव समाप्त हुआ है और सुरक्षा का वातावरण मिला है।
बीट पुलिस अधिकारी की तैनाती
पहली बार पुरुष पुलिस सहकर्मियों की तरह महिला पुलिसकर्मियों को भी बीट पुलिस अधिकारी के रूप में तैनाती मिली है। योगी सरकार ने महिला पुलिसकर्मियों को बीट पुलिस अधिकारी के रूप में तैनाती देकर महिलाओं को सशक्त बनाया है।
महिला पुलिसकर्मी आवंटित कार्यक्षेत्र में जाकर महिलाओं से सीधे संवाद करेंगी और किसी भी प्रकार की हिंसा या अपराध की घटना की जानकारी मिलने पर थाने को सूचना देकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगी।
पीएसी में तीन महिला बटालियन, 3786 पद मंजूर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ, बदायूं व गोरखपुर जिले में पीएसी की एक-एक महिला बटालियन गठित करने का फैसला किया गया है। तीनों महिला बटालियन के लिए कुल 3786 पद मंजूर किए गए हैं। प्रत्येक
महिला बटालियन के लिए 1262 पद मंजूर किए गए हैं। पीएसी की इन तीन महिला बटालियन की स्थापना लखनऊ, गोरखपुर व बदायूं में झलकारीबाई, अवंतीबाई व ऊदादेवी के नाम से की जा रही है।
