मुजफ्फरनगर। बेसिक शिक्षा विभाग को लेकर शासन स्तर से कितने भी दावे किये जा रहे हों, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। मुजफ्फरनगर में विभागीय लापरवाही के कारण 64 शिक्षक ऐसे हैं जो पिछले आठ माह से बीएसए आफिस में ही हाजिरी लगाकर बिना शिक्षण कार्य किए वेतन पा रहे हैं। ये हाल तो तब है जब अधिकांश स्कूलों में छात्रों के अनुपात या विषय के अनुरूप पर्याप्त शिक्षक तैनात नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग में आठ माह पूर्व शिक्षकों के म्यूचुअल ट्रांसफर किए थे। बदले में शिक्षक एक दूसरे जिले में गए थे। जनपद के विभिन्न परिषदीय स्कूलों में तैनात 64 शिक्षक यहां से प्रदेश के अन्य जिलों में गए थे, उनके बदले 64 टीचर यहां आए थे। शिक्षकों की आपसी सहमति के बाद ही ये तबादले हुए थे। आठ माह पूर्व स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद इन 64 शिक्षकों ने बीएसए ऑफिस में ज्वाइन किया था। अब से पहले बीएसए सीधे स्कूलों में शिक्षक नियुक्त कर देते थे। अब ये प्रक्रिया लखनऊ से ऑन लाईन हो रही है। आठ महीने में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। ये शिक्षक प्रतिदिन बीएसए ऑफिस आते हैं। और रजिस्टर में हाजिरी लगाकर चले जाते हैं। यह सिलसिला आठ माह से लगातार चल रहा है। इसे विभाग की लापरवाही नहीं तो क्या कहा जाएगा कि एक तरफ तो कुछ स्कूल एकल चल रहे हैं और कुछ में बच्चों की संख्या की अपेक्षा शिक्षक बहुत कम हैं। ऐसे हालात में 64 शिक्षकों को स्कूल आवंटन नहीं होना व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़ा कर रहा है।
प्रदेश सरकार ने मेरिट के आधार पर शिक्षकों की जो नियुक्तियां की थी उनमें जिले को 24 शिक्षक मिले हैं। इन शिक्षकों को दो साल के अंदर छह माह का डायट का प्रशिक्षण लेना है। स्थिति यह है कि इनकी भी ढाई माह से बीएसए है। ऑफिस में हाजिरी लग रही है, इन्हें अब तक न तो वेतन जारी हुआ और न ही स्कूल आवंटित हुआ ऐसे में अगर इन्हें छह माह की ट्रेनिंग ही दिला दी जाती हो इनका ढाई माह खराब न होता।
12 को मिल सकते हैं स्कूल : बीएसए
बीएसए मायाराम का कहना है कि अब स्कूलों का आवंटन पोर्टल के माध्यम से लखनऊ से हो रहा है। हम इसमें कुछ कर नहीं सकते। लखनऊ से सभी 64 शिक्षकों का डेटा आया है, इन्हें चैक किया जा रहा है। जानकारी मिल रही है कि 12 अक्तूबर को इन शिक्षकों को स्कूल आवंटित हो सकते हैं। नई नियुक्ति के शिक्षकों को लेकर अभी कोई आदेश नहीं आया है।
