कोरोना ने बदली सोच, परिषदीय स्कूलों में संख्या बढ़ी
वकेवर- कोरोना के कम होने के बाद लोगों का निजी मांटेसरी स्कूलों से लगाव कुछ कम हुआ है। परिषदीय स्कूलों में अपने छोटे बच्चों को पढ़ाने के प्रति झुकाव अधिक हो रहा है। परिषदीय स्कूलों छात्र संख्या गई है। कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को पब्लिक स्कूलों की जगह परिषदीय स्कूलों में प्रवेश दिलाया है।
परिषदीय विद्यालयों में बड़ी संख्या के पीछे महंगी फीस भी एक मुख्य बजा है महेवा में पिछले सालों की अपेक्षा इस साल परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से कक्षा आठ तक के तकरीबन सौन हजार बच्चे बढ़े हैं। पिछले साल महेवा के 242 परिषदीय स्कूलों में कुल छात्र संख्या 20 हजार 382 थी। वहीं इस वर्ष अब तक यह छात्र संख्या साढ़े 23 हजार 543 है, जिसमें छात्र 11 हजार 846 जबकि छात्राएं 11 हजार 697 है।
ये बड़ी हुई छात्र संख्या केवल कक्षा एक में ही नहीं है कि कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक में प्रवेश हुए हैं। केवर कम्पोजिट विद्यालय में इस वर्ष रिकॉर्ड 115 नए प्रवेश हुए हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य बलराज चतुर्वेदी बताते है कि विद्यालय में कुल 445 छात्र संख्या पहुंच गई है।
यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। लखना कस्बा स्थिति प्राथमिक विद्यालय प्रथम के प्रधानाचार्य शाहिद जमाल बताते हैं कि उनके स्कूल में 70 नए बच्चों ने प्रवेश लिया है। कम्पोजिट विद्यालय करबाबुजुर्ग की इंचार्ज प्रधानाचार्या रश्मि पालीवाल बताती हैं कि उनके विद्यालय में 41 नए प्रवेश हुए हैं। चंदपुरा प्राथमिक स्कूल के प्रधानाचार्य शिवकुमार ने बताया कि विद्यालय में पिछली साल कुल 27 छात्र संख्या थी जो इस साल 43 हो गई। कई बच्चे पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे, वह नाम कटवाकर उनके विद्यालय में आए हैं। करीब तीन हजार छात्र संख्या बढ़ी है।
