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Tuesday, December 28, 2021

प्रशंसनीय: बोलने व चलने में असमर्थ छात्र ने ठानी तो दिव्यांगता ने हार मानी

 व्हीलचेयर से रोज जाता है स्कूल, समझाकर आगे बढ़ा रहा है अपनी पढ़ाई का सिलसिला

अगवानपुर मंजिल उन्हें मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है पंख से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है। यह कहावत बोलने व चलने में असमर्थ अनस पर बिल्कुल सटीक बैठती है। दिव्यांग अनस के हौसले में उड़ान है। समझने की ताकत ने उसमें जुनून भर दिया। दिल में पढ़ाई की लगन के कारण कामयाबी के पथ पर अनस आगे बढ़ रहा है। उसका सफर आज आठवीं कक्षा तक पहुंच गया। मां और छोटे भाई की मदद ने उसके हौसलों को मजबूती दी। उसके जज्बे से शिक्षक भी प्रभावित हैं। वह उसकी हरसंभव मदद करने को तैयार रहते हैं।



नगर पंचायत अगवानपुर के मोहल्ला कलालपुरी निवासी अनस (12) पीर का बाजार स्थित जूनियर हाईस्कूल में आठवीं का छात्र है। उसके पिता पप्पू वेलदार हैं और मां फरजाना गृहिणी हैं। छोटा भाई अमन सातवीं और शादाब राजा पांचवीं का छात्र है, जबकि सबसे छोटी बहन जिकरा है फरजाना के मुताबिक उनका बेटा अनस दिव्यांग है। उसमें समझने का हुनर है। उसने स्कूल में पढ़ने की जिद ठान ली। वर्ष का था तो पड़ोसी के बच्चों को यूनिफॉर्म में स्कूल जाता देखकर रोने लगता था। उनके साथ में स्कूल जाने की जिद करता था। मां के मना करने पर परेशान हो जाता था। परिजनों से स्कूल जाने की जिद पर अड़ जाता था। बेटे की खुशी के कारण मां ने उसका प्राइमरी स्कूल में दाखिला करा दिया। वह बेटे को रोज गोद में उठाकर स्कूल छोड़ने और लेने जाती थीं। आखिरकार निकालत पर शिक्षकों को तरस आया। उन्होंने प्रशासन से बच्चे के लिए व्हीलचेयर की डिमांड रख दी। शिक्षकों के अनुरोध पर प्रशासन ने दिव्यांग अनस को मदद के रूप में व्हीलचेयर मुहैया करा दी। व्हीलचेयर ने उसके हौसलों में चार चांद लगा दिए। अब छोटे भाई के साथ व्हीलचेयर से स्कूल जाकर पढ़ाई का सिलसिला आगे बढ़ा रहा है।

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