व्यक्तिगत प्रयास से हरायपुर के विद्यालय को कॉन्वेंट जैसा बना दिया, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर से संचालित होती है स्मार्ट क्लास, सीसीटीवी कैमरे लगे
बदायूं। बिसौली के कंपोजिट विद्यालय हरायपुर में प्रधानाध्यापक कुंवरसेन ने व्यक्तिगत प्रयासों से स्कूल का कायाकल्प कर दिया। गंभीर बीमारी भी उनके जज्बे की कम न कर सकी। आज उनका स्कूल कॉन्वेंट स्कूल की श्रेणी में है। बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ते हैं। में उन्हें वर्ष 2016 में राष्ट्रपति से
पुरस्कार भी मिल चुका है। कुंवरसेन ने वर्ष 2010 में जब स्कूल ज्वाइन किया था तो वहां की हालत उन तमाम सरकारी स्कूलों की तरह ही थी, जहां न तो चहारदीवारी थी, न ढंग से बच्चों के बैठने का तक का इंतजाम नहीं था
पीने के लिए पानी था। अवकाश के बाद ग्रामीण यहां पशु बांध लेते थे कुंवरसेन बताते हैं कि स्कूल की यह दशा देखी तो उन्हें बड़ा दुख हुआ। इसके बाद उन्होंने इसका कायाकल्प करने की ठान ली। पहले जनसहयोग से कुछ धन एकत्र किया और सबमर्सिबल पंप लगवाया। अपने पास से धन लगाकर बिजली की व्यवस्था की।
उन्होंने बताया कि स्कूल में हरियाली लाने के लिए वह बाइक से 28 किमी दूर चंदौसी जाते थे। वहां से अशोक के छोटे पेड़ लेकर आते थे। धीरे धीरे स्कूल में हराभरा होने लगा। स्कूल में पेंट भी खुद के पैसे से कराया। बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया। इसके बाद भी संतोष नहीं हुआ तो साल 2013 में एक प्रोजेक्टर का इंतजाम किया और उसके माध्यम से बच्चों को पढ़ाने लगे।
आज स्कूल में दो प्रोजेक्टर, तीन डेस्कटॉप व दो लैपटॉप के माध्यम से स्मार्ट क्लास का संचालन किया जाता है। बच्चों और स्कूल की सुरक्षा के लिए आठ सीसीटीवी कैमरे भी यहां लगे हैं। ज्यादातर कामों के लिए अपने निजा भन का ही उन्होंने इस्तेमाल किया ।
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