गोंडा। परिषदीय स्कूलों में पठन पाठन बेहतर बनाने से जुड़ी परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही। जिले में संचालित करीब एक हजार परिषदीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की तैनाती न होने को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है स्कूलों में स्थाई प्रधानाध्यापक न होने के साथ ही करीब तीन सौ विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी बच्चों की पढ़ाई में अड़चन पैदा कर रही है। इन परिषदीय विद्यालयों में बीते छह सालों से पदोन्नति प्रक्रिया अटकी पड़ी है। इस कारण योग्यता पूरी करने के बाद भी स्कूलों में तैनात सहायक अध्यापकों को खाली पदों पर तैनाती नहीं मिल पा रही है।
प्रधानाध्यापक की तैनाती न होने वाले विद्यालयों में संचालन की पूरी जिम्मेदारी शिक्षण कार्य के साथ ही सहायक अध्यापकों को संभालनी पड़ती है। इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त भत्ता भी नहीं दिया जाता है। जिले में 2612: परिषदीय स्कूलों में एक हजार के करीब स्कूलों में प्रधानाध्यापक ही नहीं हैं। जूनियर हाईस्कूलों में भी प्रधानाध्यापकों की कमी है। 421 जूनियर हाईस्कूलों में 387 में ही प्रधानाध्यापक हैं 34 जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं।
पदोन्नति न होने से प्राथमिक स्कूलों को प्रधानाध्यापक ही नहीं मिल पा रहे हैं। करीब 966 स्कूलों में सहायक अध्यापकों को ही प्रधानाध्यपक का प्रभार दे दिया गया है। इससे स्कूलों के संचालन से जुड़े प्रशासनिक काम काज में भी बढ़ा अनावश्यक विवाद विद्यालयों में शिक्षण कार्य के साथ अन्य इंतजाम में परेशानी बढ़ा रहा है। ऐसे एक दर्जन से अधिक स्कूलों के मामलों की जांच का कार्य भी बीएसए स्तर पर लंबित है।
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