सहरसा / महिषी, हिन्दुस्तान टीम। तटबंध के अंदर विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का खुलासा डीएम के निरीक्षण के दौरान हुआ। दियारा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे डीएम जब उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय सिरवार पहुंचे तो विद्यालय में ताला लगा था। डीएम वैभव चौधरी के सख्त निर्देश के बाद शिक्षा विभाग कार्रवाई में जुट गया है। स्कूल के हेडमास्टर सहित सभी अनुपस्थित शिक्षकों को निलंबित किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक मध्य विद्यालय द्वारा 350 बच्चों की आईवीआरएस पर उपस्थिति दर्ज की जा रही है। विभागीय लोगों द्वारा बताया जा रहा है कि बीआरपी पर मिलीभगत का आरोप है। इनसे भी स्पष्टीकरण पूछा जाएगा। विद्यालय के हेडमास्टर से तीन महीने की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। नियोजित शिक्षकों पर कार्रवाई के लिए नियोजन इकाई को पत्र लिखा जा रहा है। डीईओ अनिल कुमार ने कहा कि स्कूल बंद था। दोषी पर कार्रवाई की जा रही है।
तटबंध के भीतर बसे गांवों का लिया जायजाः मंगलवार को डीएम ने कोसी तटबंध के भीतर बसे गांवों में जाकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जहां एक ओर लोगों से उनकी समस्याओं को जाना, वहीं विशनपुर स्कूल में लगे स्वास्थ्य शिविर का भी निरीक्षण किया। एसडीआरएफ की वोट से सदर एसडीओ प्रदीप झा व जिला स्तरीय अन्य अधिकारियों के साथ राजनपुर घाट से पहले घोघसम गए।
वहां से वे विशनपुर प्राथमिक विद्यालय गए। जहां विद्यालय परिसर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावितों के लिए आयोजित किये गए चिकित्सा शिविर का उन्होंने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्थानीय लोगों से चिकित्सकों द्वारा किए जा रहे ईलाज व दवा वितरण के संबंध में जानकारी लिया। उन्होंने ग्रामीणों से विद्यालय के नियमित
खुलने, शिक्षकों की उपस्थिति की जानकारी हासिल किया। उन्होंने अन्य योजनाओं की भी जानकारी ली। विशनपुर के बाद अधिकारियों का दल सिरवार व बघौड़ होते वापस महपुरा कारू स्थान में निकले। मौके पर सीओ अनिल कुमार, जल संसाधन विभाग के चन्द्रायण डिवीजन के कार्यपालक अभियंता अफजल आलम, स्वास्थ्य विभाग के डॉ. सुनीता कुमारी, अस्पताल प्रबंधक अफजल हुसैन, बीसीएम अभिषेक कुमार, रेखा कुमारी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। इधर डीएम सहित अधिकारियों के दल के बघौड़ के कटाव स्थल पर नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने बताया कि हमलोग कटाव स्थल पर इंतजार करते रहे, लेकिन डीएम नहीं पहुंचे, जिससे हमलोग उनके सामने अपनी इस समस्या को नहीं रख सके।

