लाटघाट। अंग्रेजी बोलते छात्र, 20 तक पहाड़े भी याद। बैठने के लिए उम्दा कुर्सियां और टेबल, साफ-सुथरा स्कूल परिसर, दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग, पीने को वॉटर कूलर का ठंडा पानी, खेलने को शतरंज व झूले। इन सब बातों को सुनकर आपके जेहन में यकीनन किसी पब्लिक या कॉन्वेंट स्कूल की तस्वीर उभर रही होगी। लेकिन आप गलत हैं, ये सब सरकारी स्कूल में है। आप भी चौंक गए। जी हां, हम बात प्राथमिक विद्यालय दाम महुला की कर रहे हैं। इस स्कूल की सूरत किसी और ने नहीं, बल्कि यहां तैनात प्रधानाध्यापक की दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन का नतीजा है। उन्होंने थोड़ा प्रयास और अपने शिक्षकों की मदद से स्कूल की ऐसी तस्वीर बदली कि ये स्कूल परिषदीय स्कूलों के लिए नजीर बन गया।
प्राथमिक स्कूल दाम महुला में प्रभारी प्रधानाध्यापक अविनाश शाही ने बताया कि 27 अप्रैल 2021 में जब उन्हें इस विद्यालय का प्रभारी बनाया गया तो विद्यालय में कुछ नहीं था। उन्होंने बताया कि गोरखपुर जनपद के एक मोंटेसरी विद्यालय के एनुअल फंक्शन में वह शामिल हुए थे। जहां उन्होंने कई व्यवस्थाएं देखीं। वहीं से उन्हें प्रेरणा मिली और अपने विद्यालय में भी उसी तरह की व्यवस्था करने का प्रण लिया। इसके बाद वह अध्यापकों के साथ मीटिंग किए। सीनियर अध्यापिका राधिका गोंड़ ने प्रस्ताव रखा और सभी अध्यापक सहमत हुए और अपने निजी प्रयास से व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि 50 हजार रखरखाव के लिए आता है। जिससे कुछ रंगा पुताई आदि की जाती है। पर इसे विद्यालय को स्मार्ट नहीं बनाया जा सकता था। अपने निजी प्रयास व शिक्षकों के सहयोग से विद्यालय में वाईफाई, स्मार्ट टीवी, स्विमिंग पूल, सीसीटीवी कैमरा, बच्चों को बैठने के लिए बेंच व डेस्क, महापुरुषों का चित्र, वाटर कूलर, कूलर व पंखा और अच्छे फूल-पत्ती की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि विद्यालय में कुल 123 छात्रों की संख्या है। जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक की उपस्थिति प्रतिदिन रहती है। छह अध्यापकों का स्टाफ है।
खुद के पैसे से उपलब्ध कराते स्टेशनरी का सामान
लाटघाट। प्रधानाध्यापक अविनाश शाही ने बताया कि यहां गरीबों के बच्चे भी पढ़ाई करने आते हैं। आए दिन बच्चों का पेंशल व रबर खो जाता है। माता-पिता उन्हें उपलब्ध नहीं करा पाते हैं तो हम और हमारे शिक्षक मिलकर उन्हें स्टेशनरी का भी सामान उपलब्ध कराते हैं। ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।
बच्चों को दी जाती सामान्य ज्ञान की जानकारियां
लाटघाट। स्कूल की खासियत यह है कि यहां के छात्रों को 20 तक पहाड़े जुबानी याद हैं, वे अंग्रेजी भी थोड़ी-थोड़ी बोलते हैं। रोजाना स्कूल की शुरूआत प्रार्थना के बाद नैतिक शिक्षा, योग और सामान्य ज्ञान की क्लास से होती है, जिसमें देश-दुनिया, महापुरुषों, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंडल, जिला, तहसील, ब्लॉक, न्यायपंचायत, ग्राम पंचायत, वार्ड आदि की जानकारी दी जाती है। फिर अन्य विषयों की पढ़ाई होती है।
अभिभावकों के साथ हर महीने में होती बैठक
लाटघाट। प्रधानाध्यापक अविनाश शाही ने बताया कि महीने के अंतिम सप्ताह में स्कूल परिसर में ही अभिभावकों की मीटिंग होती है। बच्चों के प्रगति रिपोर्ट ली जाती है। अभिभावक और अध्यापक संवाद करते हैं जो कुछ कमी होती है उसे दूर किया जाता है। पहले की अपेक्षा अब बच्चों में उत्साह देखा जा रहा है।
प्रदेश स्तर का प्राथमिक विद्यालय बनाना ही लक्ष्य
लाटघाट। प्रधानाध्यापक अविनाश शाही ने कहा कि हमार और हमारे शिक्षकों का यही लक्ष्य है कि हम सभी मिलकर इस विद्यालय को प्रदेश स्तर का प्राथमिक विद्यालय बनाए। बच्चों को शिक्षा के साथ ही अच्छा संस्कार दिया जाए। अन्य विद्यालय के लोग भ्रमण करने प्राथमिक विद्यालय दाम महुला पहुंचे, ऐसा इसे बनाने का हमारा लक्ष्य है।
विद्यालय में तीन बार होती प्रार्थना
लाटघाट। विद्यालय में तीन बार प्रार्थना होती है। सुबह में मां सरस्वती की प्रार्थना होती है। इसके बाद दोपहर में भोजन के समय बच्चे शिक्षकों के साथ प्रार्थना करते हैं। इसके बाद अवकाश होने पर किया जाता है।

