राशि खर्च में करें नियमों का पालन : डीईओ
शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल की छोटी-मोटी आवश्कताओं की पूर्ति के लिए हर साल विकास मद की राशि विद्यालयों को उपलब्ध करायी जाती है। इसके बाद भी कई विद्यालय अभी भी बदहाल पड़ा हुआ है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार चालू शैक्षणिक सत्र में जिले के 2166 प्रारंभिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में नौ करोड़ 61 लाख रुपये भेजे गए हैं।
डीईओ आनंद विजय ने विद्यालयों के प्राचार्यों को विभागीय नियमानुसार ही राशि खर्च करने का आदेश दिया है, अन्यथा की स्थिति में विभागीय
कार्रवाई की जाएगी। विभागीय आकड़े के अनुसार बीआरसी के विकास के लिए प्रत्येक बीआरसी को दो लाख पांच हजार रुपये भेजे गए हैं। यानि, बीआरसी के विकास के लिए 41 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसी तरह, सीआरसी के विकास के लिए भी हर सीआरसी को 43 हजार रुपये दिए गये है। जिले में 267 सीआरसी को 11 करोड़ 48 लाख रुपये भेजे गए है।
खर्च के बाद भी विद्यालय बदहाल क्यों सवाल यह कि हर साल इतनी बड़ी राशि शिक्षा विभाग बीआरसी, सीआरसी व विद्यालयों के विकास के लिए खर्च कर रहा है। तब भी कई विद्यालय बदहाल क्यों है। आखिर बदहाल विद्यालयों की राशि
कार्यालय जिला शिक्षा पदाधिकारी कहां खर्च हो रही है। विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं यथा, पेयजल के लिए बोरिंग, चापाकल, बिजली की व्यवस्था, विद्यालय भवन की मरम्मत पर अलग से राशि खर्च की गयी है। बुद्धिजिवियों ने बताया कि विकास मद की राशि खर्च के बाद स्थलीय जांच कराने की जरुरत है।
ईको क्लब फॉर मिशन की
जिला शिक्षा कार्यालय का भवन।
भेजी जा रही राशि : जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में ईको क्लब फॉर मिशन की भी राशि भेजी जा रही है।
प्राथमिक विद्यालय को पांच हजार, मध्य विद्यालय को दस तो हाईस्कूलों को 25 हजार रुपये भेजे जा रहे हैं। सभी तरह की राशि का खर्च विभागीय टैक्स भुगतान करते हुए प्राचार्यों को खर्च करने का विभागीय प्रावधान है।

