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Tuesday, February 10, 2026

69,000 शिक्षक भर्ती आदेश और चयनित एवं अचयनित में भ्रम

 69,000 शिक्षक भर्ती आदेश और चयनित एवं अचयनित में भ्रम 


सामान्य वर्ग का होने का मतलब ये नहीं है कि आप ग़लत को ग़लत न कहें , शुरू से एक बिंदु कहना चाहता हूँ मैं जो कि हमेशा से कहता आया हूँ कोई भी नियुक्ति, ट्रांसफर या समायोजन जब तक लखनऊ से ये करना चाहेंगे कभी सही नहीं होगा और ये बात एक नहीं कई मर्तबा आपको बता चुका हूँ क्योंकि बेसिक के सहायक अध्यापक का पद जिला कैडर का है लेकिन इन्होंने भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के नाम पर केवल अभ्यर्थियों और नियुक्त शिक्षकों से छल किया है इसका सटीक उदाहरण है MRC केस जो इनकी 68,500 में हुआ और सरकार को हराकर अभ्यर्थी वापस आए और और अभी 69,000 में भी है । 


जो सामान्य वर्ग का अभ्यर्थी कह रहा है कि आरक्षण में गड़बड़ नहीं हुई है मैं तैयार हूँ सिद्ध करने के लिए क्योंकि सही को सही और ग़लत को ग़लत बोलने का साहस है, मैंने कभी भी चयनित का नुक़सान करने की बात नहीं की लेकिन ग़लत को ग़लत भी न कहूँ तो फिर क्या ही मतलब है शिक्षक के पद का , ये मैं मानता हूँ hypothetical आंकड़ा दिया जाता है लेकिन आठ से नौ हज़ार का घोटाला है । 


भर्ती और इनके राज में पारदर्शी , शुचिता पूर्ण और एकदम crystal clear , this is all bullshit । बोलने और देखने में सब अच्छा ही तो लग रहा है वरना जो राम के नाम पर खा गए तो आपको हमें तो जरूर ही कुछ दे रहे हैं । 


आदेश को पढ़िये न्यायमूर्ति दत्ता साहब के शब्दों पर ध्यान दीजिए , पहले पैराग्राफ को पढ़िये, हमने अपना indication सरकारी अधिवक्ता को दे दिया है दस दिन में instructions लेकर आयें , पहले पंद्रह मिनट राज्य को सुना जाएगा । 


एक बात हम आपको बता दें घोटाला हुआ है और ये अब सरकार के गले की फाँस बन चुका है और जो कोर्ट कहेगी वही होगा , लड़ाई आरक्षित वर्ग और सरकार के बीच में है किसी को कोर्ट से नौकरी मिल रही है तो काहे चयनित परेशान है , अरे अपनी नौकरी कीजिए ये नेता मंत्री देश को लूट रहे हैं कम से कम कोर्ट से ही दो रोटी का इंतजाम हो जाये किसी के घर का । मैं हमेशा से शिक्षक भर्ती के पक्ष में रहा हूँ और ईश्वर से डरकर बोल रहा हूँ कोई भर्ती नहीं आती न हमें नियुक्ति मिलती और न ही 68500 & 69000 होती अगर शिक्षा मित्र बाहर नहीं होते । 


मैं अपने से छोटों को स्नेह देता हूँ लेकिन अगर सर पर चढ़कर नाचोगे तो कोई तो सही बोलेगा या नहीं , हमेशा जो परेशान रहा मैं यही कहा नौकरी नहीं जाएगी , आरक्षित वर्ग वाले संपर्क किये तो भी मैं सीधा कहा कि सरकार के इस झाँसे में न आना कि भविष्य में दे देंगे इसी में माँगो जो भी कुछ माँगना है । इसमें ग़लत क्या है ? 


हक़ीक़त बोलना सीखो और सच स्वीकारना , जातिवाद का जहर केवल राजनीति में ठीक लगता है , मैं भी क्षत्रिय हूँ लेकिन पक्षधर हूँ कि हाँ सबके घर रोशन रहें , अभी नए नए जोश से नियुक्ति पाये हो , मेरे सामने कितनी बड़ी चुनौतियां थी कि नौकरी लग पाने के बाद भी मैं नौकरी कर पाऊँगा या नहीं ये तक सवाल था लेकिन कभी न रोया न हारा केवल भागा कि नहीं नौकरी तो लेनी है और उसी टीस के साथ हमेशा अपने अनुजों को guide किया सहारा दिया यहाँ तक कि 69,000 के लाइव सेशन करने वालों को भी , क्या यार इंसानियत तो रखो कम से कम । 


महादेव सभी का भला करें 



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