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Thursday, February 5, 2026

अनुदेशक फैसले का सरल सारांश (बिन्दु 70-73 )

 *अनुदेशक फैसले का सरल सारांश (बिन्दु 70-73 )*

सुप्रीम_कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अंशकालिक/संविदा अनुदेशक शिक्षकों के पक्ष में बड़ा और राहत भरा फैसला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि—

11 महीने की अवधि समाप्त होने के बाद भी लगातार काम कराने पर ये शिक्षक केवल संविदात्मक नहीं माने जा सकते।

इन्हें कहीं और नौकरी करने से रोका गया, इसलिए इन्हें अंशकालिक भी नहीं कहा जा सकता।

10 वर्ष से अधिक समय तक लगातार कार्य करने वाले अनुदेशक स्थायी माने जाने योग्य (Deemed Permanent) हैं और ऐसे पद स्वतः सृजित माने जाएंगे।

मानदेय तय करने का अधिकार केवल PAB (Project Approval Board) को है, कोई अन्य प्राधिकरण इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

PAB द्वारा स्वीकृत ₹17,000 प्रतिमाह मानदेय को कम करना अवैध है।

₹7,000 का मानदेय देना बेगार (Article 23 का उल्लंघन) और अनुचित श्रम है।

मानदेय स्थिर नहीं रह सकता, इसमें आवधिक संशोधन अनिवार्य है।

सभी अनुदेशक सत्र 2017-18 से ₹17,000 प्रतिमाह पाने के हकदार हैं।

भुगतान 01 अप्रैल 2026 से शुरू होगा।

बकाया राशि 6 महीने के भीतर दी जाएगी।

पहले भुगतान की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी, बाद में वह केंद्र से राशि वसूल सकती है।

🧑‍⚖️ अंशकालिक अनुदेशक शिक्षकों के लिए ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ

न्यायमूर्ति पंकज मित्तल एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले

ने उत्तर प्रदेश के अंशकालिक अनुदेशक शिक्षकों के पक्ष में

बड़ा और राहत भरा निर्णय सुनाया है।

🔹 10 वर्षों से अधिक सेवा करने वाले अनुदेशक संविदात्मक नहीं

🔹 ऐसे पद स्वतः सृजित माने जाएंगे

🔹 ₹7,000 मानदेय देना बेगार और असंवैधानिक

🔹 ₹17,000 प्रतिमाह मानदेय पूरी तरह वैध

🔹 2017-18 से ₹17,000 पाने के हकदार

🔹 भुगतान 01.04.2026 से शुरू होगा

🔹 बकाया राशि 6 महीने में मिलेगी

📌 कोर्ट ने साफ कहा—

👉 मानदेय में संशोधन न करना अनुचित व्यवहार है

👉 काम लिया गया तो सम्मानजनक पारिश्रमिक देना होगा

✊ यह फैसला केवल अनुदेशकों के लिए नहीं,

बल्कि श्रम के सम्मान और न्याय की बड़ी जीत है।



अनुदेशक फैसले का सरल सारांश (बिन्दु 70-73 ) Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Updatemarts

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