बाराबंकी के उच्च प्राथमिक विद्यालय बिंदियामऊ में सहायक अध्यापिका वंदना वर्षों से अनुपस्थित हैं। इसके बावजूद उन्हें सरकारी खजाने से नियमित रूप से वेतन मिल रहा है। इस मामले ने जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिक्षिका वंदना की अनुपस्थिति का यह सिलसिला काफी समय से जारी है। चौंकाने वाली बात यह है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर भी वह विद्यालय में उपस्थित नहीं रहीं। यह स्थिति कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और शिक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों को उजागर करती है।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका किरण पांडे ने आरोप लगाया है कि वंदना कभी स्कूल नहीं आतीं। उनके अनुसार, हाजिरी रजिस्टर खंड शिक्षा कार्यालय भेजा जाता है और वहीं से उनकी उपस्थिति दर्ज होकर वापस आ जाती है। प्रधानाध्यापिका ने जब इस अनियमितता पर सवाल उठाया, तो उन्हें ग्राम प्रधान और खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा चुप रहने की हिदायत दी गई।
विद्यालय में पिछले 10 वर्षों से कार्यरत रसोईया मीरा देवी ने बताया कि उन्होंने वंदना मैडम को कभी स्कूल में नहीं देखा। अनुदेशक संजू देवी ने भी पुष्टि की कि शिक्षिका वंदना उन्हें केवल दो-तीन बार ही विद्यालय में उपस्थित मिली थीं।
खंड शिक्षा अधिकारी ने इन आरोपों से इनकार किया है और मामले की जांच कराने की बात कही है। इस संबंध में, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) नवीन कुमार पाठक ने बताया कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं थी। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी को दो दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह मामला केवल एक शिक्षिका की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और बच्चों के शिक्षा के अधिकार से जुड़े गंभीर मुद्दों को भी उजागर करता है। इसमें जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, और ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
