फर्जी सूचना वालों के कारण बाहर हो रहे योग्य अभ्यर्थी
आयोग ऐसे छात्रों को डिबार करे तो लगे रोक
यह सही बात है कि लोक सेवा आयोग के लिए प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर लाखों अभ्यर्थियों के आवेदन की स्क्रूटनी करना मुश्किल है। इसी की आड़ में अयोग्य अभ्यर्थी आवेदन कर देते हैं। प्रतियोगी छात्र राजन त्रिपाठी का कहना है कि जिस प्रकार नकल या दूसरी अनियमितताओं पर कार्रवाई होती है उसी प्रकार गलत तथ्य के साथ पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। आयोग को चाहिए कि ऐसे फर्जी अभ्यर्थियों को सभी परीक्षाओं से डिबार करे।
प्रयागराज, । उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा में फर्जी सूचना के आधार पर शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के कारण सैकड़ों योग्य अभ्यर्थी हर साल बाहर हो जा रहे हैं। पीसीएस 2025 में भी मुख्य परीक्षा के आवेदन की स्क्रूटनी के बाद आयोग ने 410 अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया है। इनमें 260 अभ्यर्थी ऐसे हैं जिनके पास आवेदित पद के लिए आवश्यक शैक्षिक अर्हता ही नहीं थी।
इसके अलावा दर्जनों छात्र ऐसे भी हैं जिनके पास आरक्षण संबंधी प्रमाणपत्र नहीं थे फिर भी उन्होंने उस श्रेणी में आवेदन कर दिया और जब मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन मांगे गए तो आयोग को पत्र लिखकर उस श्रेणी में नहीं रखने का अनुरोध करने लगे। ये संख्या तो उन अभ्यर्थियों की है जिन्होंने मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन किया है। तमाम अभ्यर्थी ऐसे हैं जो अर्ह नहीं होने के बावजूद प्रारंभिक परीक्षा में सफल तो हुए लेकिन उन्होंने मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन ही नहीं किया। यदि इन अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा के आवेदन के समय ही रोक दिया जाता तो इनके स्थान पर योग्य अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल होते। ये पहली बार नहीं है। इससे पहले पीसीएस 2024 में 259 और 2023 में 153 अभ्यर्थियों को अर्ह नहीं होने समेत अन्य कारणों से मुख्य परीक्षा से बाहर कर दिया गया था। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में सीटों की संख्या में 15 गुना अभ्यर्थियों को ही मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई किया जाता है। ऐसे में मुख्य परीक्षा के लिए सफल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या सीमित होती है और उसमें भी फर्जीवाड़ा करने वालों के आने से योग्य अभ्यर्थियों के अवसर छिन जाते हैं।

