एक साथ दो सरकारी नौकरी करने वाले को सात साल की कैद*
एक साथ दो नौकरी करते हुए अलग-अलग विभागों से वेतन हासिल करने वाले शख्स को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) सुधा सिंह ने मंगलवार को सात साल कारावास की सजा सुनाई। आरोपित ने एक ही मार्कशीट से प्रतापगढ़ में स्वास्थ्य विभाग और बाराबंकी में शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल की थी। 17 साल चली सुनवाई में आखिरकार एक साथ दो जगह नौकरी की बात साबित हो गई। इस पर कोर्ट ने कहा कि सरकार आरोपित से वेतन के तौर पर ली गई रकम की वसूली के लिए भी स्वतंत्र है।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) अनार सिंह ने बताया कि 20 फरवरी 2009 को आवास विकास कॉलोनी प्रभात सिंह ने कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें बताया था कि सतरिख के नरौली निवासी जयप्रकाश सिंह को प्रतापगढ़ की सांगीपुर पीएचसी में 26 दिसंबर 1979 को नॉन मेडिकल असिस्टेंट (एनएमए) पद पर नौकरी मिली थी। इसके बाद जयप्रकाश ने उन्ही शैक्षिक प्रमाणपत्रों से 19 जून 1993 को बाराबंकी में सहायक अध्यापक पद पर नौकरी पा ली थी। बाद में हरख ब्लॉक के नरौली प्राइमरी स्कूल का हेडमास्टर हो गया था। शिकायत पर बीएसए ने 1 अक्टूबर 2008 को जयप्रकाश को निलंबित भी किया था।
शिकायतकर्ता ने आरटीई के तहत दोनों विभागों से जयप्रकाश को जारी वेतन का व्योरा भी पेश किया था। सुनवाई के दौरान आरोपित जयप्रकाश ने यह कहकर बचने का प्रयास किया कि उसने प्रतापगढ़ में एनएमए पद से त्यागपत्र दे दिया था। वहीं, बाराबंकी के तत्कालीन बीएसए प्रवीणमणि त्रिपाठी व सांगीपुर पीएचसी में साल 2003 से 2015 तक तैनात रहे मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुरेश त्रिपाठी ने एक ही समय में दोनों स्थान से वेतन लिए जाने के सबूत दिए।।

