बेसिक व मा. स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य, ‘सुपर-30 रीडर्स’ तक चलेंगे विशेष अभियान
लखनऊ : प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक स्कूलों में इस शैक्षिक सत्र से बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से दूर कर किताबों और अखबारों की दुनिया से जोड़ने की तैयारी और तेज की जाएगी। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्कूलों में पठन संस्कृति को मजबूत बनाने, दैनिक समाचार पत्र पढ़ने की आदत विकसित करने और पुस्तकालय गतिविधियों को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देने को कहा है। अपर मुख्य सचिव शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने साफ किया है कि यह केवल अभियान नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य को संवारने का साझा संकल्प है।
इससे पहले पिछले वर्ष दिसंबर में सभी स्कूलों में अखबार पढ़ने की अनिवार्यता को लेकर उन्होंने निर्देश जारी किए थे, लेकिन कई विद्यालयों में इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही थी। इसका संज्ञान लेते हुए बुधवार को एक बार फिर उन्होंने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि स्कूलों में रीडिंग आवर्स और पठन गतिविधियों को शैक्षिक कैलेंडर का अहम हिस्सा बनाया जाए।
● अपर मुख्य सचिव पार्थ सेन शर्मा ने फिर से जारी किए बेसिक व माध्यमिक अधिकारियों को निर्देश
● सबसे अधिक पुस्तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा ‘चैंपियन रीडर ऑफ द ईयर’ का अवार्ड
एक पीरियड में सब कुछ छोड़ पढ़ने पर जोर
सभी स्कूलों में रीडिंग क्लब बनाए जाएंगे और हर सप्ताह एक पीरियड ‘सब कुछ छोड़ पढ़ें’ गतिविधि के लिए तय होगा, जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी अपनी पसंद की किताबें पढ़ेंगे। इसके अलावा हर महीने ‘पठन प्रस्तुति उत्सव’ और लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। प्राथमिक स्तर पर 20 से अधिक और उच्च प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर 30 से अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुपर-20 और सुपर-30 रीडर्स के रूप में सम्मानित किया जाएगा। सत्र के अंत में सबसे अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र-छात्रा को ‘चैंपियन रीडर ऑफ द ईयर’ घोषित किया जाएगा। इन गतिविधियों और पुरस्कारों का खर्च स्कूलों की कंपोजिट ग्रांट से वहन किया जाएगा।
सभी विद्यालय तय समय-सारणी के अनुसार पठन कार्यक्रम चलाएं और पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराएं, ताकि विद्यार्थियों को पुनरावृत्ति और स्व-अध्ययन का पर्याप्त समय मिल सके। विद्यालयों में अखबारों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ प्रार्थना सभा में प्रमुख खबरों और संपादकीय लेखों पर चर्चा कराई जाएगी। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में भाषा कौशल, शब्द भंडार, तार्किक सोच, सामाजिक जागरूकता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की क्षमता विकसित करना है।
स्कूलों और पुस्तकालयों में स्थानीय लेखकों, साहित्यकारों और वरिष्ठ पाठकों के साथ लेखक संवाद कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। वहीं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और विद्यालयी पुस्तकालयों को भी इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा। विभाग ने बताया कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की पुस्तकालयों में पुस्तकें उपलब्ध करा दी गई हैं। इसके साथ ही ‘बुक नहीं, बुक अभियान’ के तहत पुरस्कार समारोहों में स्मृति चिन्ह की जगह पुस्तकें भेंट करने पर जोर रहेगा।

