दशकों की सेवा, फिर भी अस्थायी कर्मचारी...नियमितीकरण जरूरी
■ सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शुरुआती नियुक्ति स्वीकृत पद के अधीन न होना नियमित न करने का आधार नहीं हो सकता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस कारण से किसी कर्मचारी को नियमित नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसकी नियुक्ति शुरुआत में अस्थायी रूप से या स्वीकृत पद पर नहीं हुई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर कर्मचारी कई वर्षों तक लगातार सरकारी विभागों में नियमित काम करते रहे हैं तो उन्हें नियमित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को रद्द करते हुए असम सरकार के विभिन्न विभागों में मास्टर रोल पर काम कर रहे कर्मचारियों को राहत दी। ये कर्मचारी कई सालों से सरकारी विभागों में काम कर रहे थे, मगर उन्हें नियमित नहीं किया गया था। राज्य सरकार का कहना था कि उनकी शुरुआती नियुक्ति स्वीकृत पदों पर नहीं हुई थी, इसलिए उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता।
एक जैसी स्थिति वाले कर्मचारियों से अलग-अलग व्यवहार नहीं हो सकता
पीठ ने कहा, असम सरकार ने बाद में एक कैबिनेट नीति बनाकर लगभग 30 हजार समान स्थिति वाले कर्मचारियों को नियमित भी कर दिया। ऐसे में बाकी कर्मचारियों के साथ भेदभाव करना गलत और भेदभावपूर्ण है। सरकार एक जैसी स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं कर सकती। अदालत ने साफ कहा कि समान काम करने वाले कर्मचारियों को समान अधिकार मिलने चाहिए।
■ कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार लंबे समय तक कर्मचारियों से नियमित काम लेकर उन्हें अस्थायी बताकर नहीं रख सकती और समानता संविधान की मूल भावना है और सरकार को उसी के अनुसार काम करना चाहिए।

