लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत उन शिक्षकों को टीईटी ( शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण करने का एक और मौका मिलेगा, जिन्होंने अभी तक टीईटी या सीटीईटी की योग्यता हासिल नहीं की है।
शासन स्तर पर उनके लिए विशेष टीईटी परीक्षा कराने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सभी जिलों से ऐसे शिक्षकों की संख्या एक सप्ताह के भीतर मांगी गई है।
विशेष सचिव बेसिक शिक्षा अवधेश कुमार तिवारी ने इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 29 मई के आदेश के बाद की जा रही है, जिसमें शिक्षकों को टीईटी योग्यता प्राप्त करने के लिए दी गई समय सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने पूर्व आदेश में आंशिक संशोधन किया है।
अदालत ने शिक्षकों को टीईटी योग्यता प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 के बजाय 31 अगस्त 2028 निर्धारित की है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इसके बाद समय सीमा बढ़ाने की कोई मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि राज्यों और संबंधित अधिकारियों को टीईटी परीक्षा नियमित रूप से कराने का प्रयास करना चाहिए। बेहतर होगा कि हर वर्ष दो बार लगभग छह महीने के अंतराल पर परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि पात्र शिक्षकों को आवश्यक योग्यता प्राप्त करने का पर्याप्त अवसर मिल सके।
मंगलवार को शासन ने बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की जिला सूचना मांगी है। इसमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत कुल नियमित शिक्षकों की संख्या, टीईटी/सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों की संख्या और अभी तक टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों की संख्या का विवरण शामिल है।
यह सूचना एक सप्ताह के भीतर शासन को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके आधार पर कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी परीक्षा आयोजित कराने को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश में करीब 1.86 लाख शिक्षक टीईटी नहीं हैं। विशेष टीईटी की मांग शिक्षक संगठन और शिक्षक विधायकों की ओर से लगातार मांग की जा रही थी।
