अनपढ़ और इंटर फेल खाली कर रहे आईएएस-आईपीएस के खाते
बिहार और उन्नाव के इंटर फेल और अनपढ़ युवक साइबर ठगी की फर्जी कंपनियां बनाकर आईएएस, आईपीएस जैसे पढ़े लिखे लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसाकर रुपए ऐंठ रहे हैं। आरोपियों ने कंपनियों के लिए कूटरचित तरीके से निजी बैंकों में खाते खुलवाए थे। फिर साइबर ठगों को खाते देकर उसमें कमीशन मंगवाते थे। साइबर सेल और सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने साइबर ठगी करके करोड़ों रुपए के लेनदेन करने वाले अंतरराज्यीय कारपोरेट साइबर ठग गिरोह का खुलासा कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
एडीसीपी दक्षिणी रल्लापल्ली वसंत कुमार ने बताया कि पुलिस टीम ने आवास विकास योजना के लाइट हाउस के ब्लॉक-के में फ्लैट नंबर ए/1010 से चार ठगों को पकड़ा है। तीन युवक बिहार चंपारण सुगौली के सुगांवडीह के हैं। इनमें निप्पु कुमार अनपढ़ मजदूर है। मनीष कुमार 11वीं पास करके कॉस्मेटिक की दुकान पर और इंटर पास सन्नी कुमार निजी कंपनी में नौकरी करता है। वहीं, उन्नाव पीतांबर नगर निवासी व बारबर शॉप चलाने वाला सत्येंद्र सविता भी इंटर पास है।
लोगों से केवाईसी दस्तावेज हासिल करते : गोसाईगंज एसीपी ऋषभ यादव ने बताया पकड़े गए आरोपी फर्जी कंपनियां के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे।
उन बैंक खातों से साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर निकाल लेते। पड़ताल में यह सामने आया है कि गिरोह में शामिल युवा लोगों को बहलाकर उनके केवाईसी के बहाने से दस्तावेज हासिल करते थे। फिर उनके नाम पर फर्जी फर्म, शेल कंपनियों का पंजीकरण कराकर कारपोरेट बैंकों में खाते खुलवाते थे.
व्हाट्सऐप ग्रुप से ही कॉल करते थे आरोपी
इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टेबाजी समेत अन्य अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन को ट्रांसफर करते थे। आरोपित व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए देश व विदेश में बैठे संचालकों से बातचीत करते थे। खातों में आने वाली साइबर ठगी की धनराशि को कई स्तर पर ट्रांसफर कर देते थे, जिससे खाते में आने वाली धनराशि का स्रोत छुपाया जा सके। इसके बदले ठगों से मोटी कमीशन लेते थे।
आईईएमआई नंबरों पर मिलीं 718 शिकायतें
सुशांत गोल्फ सिटी के अतिरिक्त इंस्पेक्टर विनोद कुमार पांडेय ने बताया जांच में यह सामने आया कि आरोपी जो मोबाइल नंबर इस्तेमाल करते थे। उन मोबाइलों की आईईएमआई पर वित्तीय संदिग्ध गतिविधियों, लेनदेन के नाम पर विभिन्न राज्यों से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 718 शिकायत हैं। शिकायतों का सत्यापन कर यह पता लगाया जा रहा है कि साइबर ठगी की कुल कितनी धनराशि है। आरोपियों के पास से 79 चेकबुक, 77 एटीएम कार्ड, 29 सिम, 15 मोबाइल, 14 कीपैड मोबाइल, छह पीओएस मशीन, तीन लैपटॉप, कई कंपनियों के दस्तावेज, आईकार्ड, स्टांप, मोहरें मिलीं हैं।

