MP:-ई-अटेंडेंस पर फिर छिड़ा विवाद: शिक्षक बोले- पहले तकनीकी खामियां दूर करें, फिर लागू करें व्यवस्था
सीहोर। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत से पहले मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था एक बार फिर विवाद का विषय बन गई है। शिक्षा विभाग ने 8 जून से शिक्षकों के स्कूल पहुंचने और 16 जून से नियमित कक्षाएं शुरू होने के साथ ई-अटेंडेंस को अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय पर ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने की स्थिति में संबंधित शिक्षक की अनुपस्थिति मानी जाएगी और वेतन कटौती तक की कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि शिक्षकों और शिक्षक संगठनों ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा है कि विभाग पहले तकनीकी समस्याओं का समाधान करे, उसके बाद ही इसे पूरी तरह लागू किया जाए।
सात हजार से अधिक शिक्षक होंगे प्रभावित
सीहोर जिले में कक्षा 1 से 12 तक संचालित दो हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों में लगभग सात हजार शिक्षक कार्यरत हैं। विभागीय आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों को प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे तक मोबाइल के माध्यम से "हमारा शिक्षक ऐप" पर अपनी ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। इसका सीधा असर वेतन भुगतान और उपस्थिति रिकॉर्ड पर पड़ेगा।
शिक्षकों का कहना है कि पहले दिन से ही इस व्यवस्था का विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ऐप में कई तकनीकी कमियां हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं हो सका है।
क्या हैं शिक्षकों की प्रमुख शिकायतें?
शिक्षकों के अनुसार "हमारा शिक्षक ऐप" पर ई-अटेंडेंस दर्ज करने में कई प्रकार की तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों और दूरस्थ विद्यालयों में नेटवर्क उपलब्ध न होने के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। कई स्थानों पर शिक्षकों को अटेंडेंस अपलोड करने के लिए विद्यालय की छत या ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है। कई बार फेस रिकग्निशन प्रणाली सही ढंग से कार्य नहीं करती, जिससे उपस्थित शिक्षक भी अनुपस्थित दर्ज हो जाते हैं।
शिक्षकों का यह भी कहना है कि ऐप में एक साथ अधिक दबाव आने पर सर्वर धीमा पड़ जाता है और समय सीमा के भीतर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। इसके अतिरिक्त लोकेशन संबंधी त्रुटियों के कारण भी परेशानी बढ़ रही है। कई शिक्षकों को विद्यालय परिसर में उपस्थित होने के बावजूद उनकी लोकेशन स्कूल से दूर दिखाई देती है।
कुछ शिक्षकों ने डेटा सुरक्षा और निजता को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि फेस रिकग्निशन आधारित प्रणाली में व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।
शिक्षक संघ ने उठाए सवाल
प्रांतीय शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष संजय सक्सेना ने कहा कि शिक्षक ई-अटेंडेंस के विरोधी नहीं हैं, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि नेटवर्क, सर्वर और फेस रिकग्निशन जैसी समस्याएं दूर कर दी जाएं तो शिक्षक इस व्यवस्था को सहजता से स्वीकार कर सकते हैं। वर्तमान स्थिति में कई शिक्षक रोजाना तकनीकी बाधाओं के कारण मानसिक तनाव झेल रहे हैं।
विभाग ने दी सख्त चेतावनी
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिजीत सिंह द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी स्कूलों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। विभागीय अधिकारियों को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आदेश के अनुसार यदि किसी विद्यालय में ई-अटेंडेंस लागू करने में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित संकुल प्राचार्य, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। ई-अटेंडेंस के आधार पर ही वेतन आहरण संबंधी प्रस्ताव तैयार किए जाने की भी व्यवस्था की जा रही है।
अधिकारियों का पक्ष
जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस पहले से निर्धारित व्यवस्था है और अब शासन स्तर से इसे लेकर स्पष्ट निर्देश प्राप्त हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार उपस्थिति प्रणाली में पारदर्शिता लाने तथा विद्यालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
विभाग का मानना है कि यदि कोई शिक्षक जानबूझकर ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। हालांकि तकनीकी समस्याओं की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार या नई परेशानी?
ई-अटेंडेंस का उद्देश्य विद्यालयों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन तकनीकी चुनौतियों ने इसके सफल क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षक संगठन चाहते हैं कि पहले ऐप और नेटवर्क से जुड़ी कमियों को दूर किया जाए, जबकि विभाग इसे शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।
अब देखना होगा कि नए सत्र की शुरुआत के साथ सरकार और शिक्षा विभाग तकनीकी समस्याओं का समाधान कर शिक्षकों की चिंताओं को दूर कर पाते हैं या नहीं।

