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Saturday, August 8, 2026

विषय विशेषज्ञों ने ही नीट के सवाल लीक किए थे: खुलासा: सीबीआई का आरोप, तीनों एक्सपर्ट के जरिये बिचौलियों तक पहुंचे थे प्रश्न

 विषय विशेषज्ञों ने ही नीट के सवाल लीक किए थे: खुलासा: सीबीआई का आरोप, तीनों एक्सपर्ट के जरिये बिचौलियों तक पहुंचे थे प्रश्न

। नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले में सीबीआई के फास्ट ट्रैक कोर्ट में दाखिल आरोपपत्र से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञों ने अनुवाद कार्य के दौरान प्रश्नों को याद कर, संक्षेप में लिखकर और एनसीईआरटी पुस्तकों में संबंधित हिस्से चिह्नित कर प्रश्न लीक करने में अहम भूमिका निभाई।





कोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई की दलीलें सुनीं। चार्जशीट पर संज्ञान के लिए 10 अगस्त का दिन तय किया है। इसी दिन तीन आरोपियों की लाई डिटेक्टर टेस्ट की मांग पर कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा।




सीबीआई के आरोप पत्र में एनटीए के तीन विशेषज्ञों पीवी कुलकर्णी (रसायन विज्ञान), मनीषा गुरुनाथ मंधारेे (प्राणी विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान) और मनीषा संजय वाघमारे (भौतिकी) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने हाल में उस फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष आरोप-पत्र दाखिल किया है, जो प्रश्न लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अन्य अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई कर रही है।




छोटी पर्चियों पर 135 प्रश्नों के उत्तर लिखे: आरोप पत्र में कहा गया है कि जांच में सामने आया कि इन तीनों विशेषज्ञों को अनुवाद के दौरान लिखने के लिए गोपनीय कक्ष के अंदर सादे कागज उपलब्ध कराए गए थे। आरोपी पीवी कुलकर्णी ने इन कागजों का इस्तेमाल कर छोटी पर्चियों पर रसायन विज्ञान के सभी 135 प्रश्नों और उनके उत्तर विकल्पों को संक्षेप में लिखा और उन्हें छिपाकर बाहर ले गए। कुलकर्णी को प्रश्न लीक का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।




पाठ्यपुस्तकों में चिह्नित किया: आरोप पत्र में कहा गया है कि वनस्पति विज्ञान के लिए एनटीए की अंग्रेजी से मराठी अनुवादक मनीषा मंधारेे होटल लौटने के बाद एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में संबंधित जरूरी पैराग्राफ को मार्क करती थीं। एक ही तरह की सामग्री के साथ दशकों के अनुभव के कारण वह आसानी से प्रश्नों को एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक की सामग्री से जोड़ने में सक्षम थीं। आरोप पत्र में कहा गया कि भौतिकी के अनुवाद की जिम्मेदारी संभालने वाली मनीषा संजय वाघमारे प्रश्नों को संक्षेप में लिख लिया करती थीं।




इन विशेषज्ञों की गतिविधियां पकड़ में नहीं आ सकीं, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी स्थित एनटीए कार्यालय में सीसीटीवी फुटेज की निगरानी के लिए कोई विशेष नियंत्रण कक्ष नहीं था। ये प्रश्न इन विशेषज्ञों से होते हुए बिचौलियों और अन्य लोगों तक पहुंचाए गए थे। आरोप पत्र में अभ्यर्थियों के साथ बातचीत और लेन-देन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि एक अन्य आरोपी मधुकर खैरनार ने पैसे के बदले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के लिए अभ्यर्थियों से संपर्क किया। सुरक्षा के तौर पर उनके शैक्षणिक दस्तावेज और एक खाली चेक लिया तथा लीक हुए प्रश्नों को आगे बांटने में शामिल लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहा।




अब तक 13 गिरफ्तार






● 13 मई को पुणे से धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी हुई। लोखंडे ने सुबूत मिटाने के लिए फोन नष्ट करने का कथित तौर पर प्रयास किया था। अगले दिन पुणे में मनीषा संजय वाघमारे को गिरफ्तार किया गया।




● एजेंसी ने पीवी कुलकर्णी को 15 मई को लातूर से गिरफ्तार किया। 16 मई को पुणे से मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया गया। कोचिंग संस्थापक शिवराज मोतेगांवकर को लातूर से 17 मई को पकड़ा गया।




● एजेंसी ने 13 मई से अपनी कार्रवाई शुरू की, जिसके तहत राजस्थान में सबसे पहले मंगलीलाल, दिनेश और विकास बिवाल को गिरफ्तार किया गया। उनके मोबाइल फोन में 29 अप्रैल को टेलीग्राम के माध्यम से प्राप्त लीक हुआ पीडीएफ मिला था। इसके अनुसार, उसी दिन एजेंसी ने गुरुग्राम से यश यादव व नासिक से शुभम खैरनार को पकड़ा।




सुरक्षा में भारी चूक






ऐसे हुआ पेपर लीक




कागज की पर्चियां: अनुवाद के लिए मिले कागजों पर प्रश्न-उत्तर संक्षेप में लिखे और छिपाकर बाहर ले गए।




किताबों में मार्किंग: अनुवादक होटल लौटकर एनसीईआरटी की किताबों में उत्तर वाले पैराग्राफ पर निशान लगाया करते थे।




याद करके लिखा: आसान प्रश्नों को दिमाग में याद रखा और बाद में लिखकर लीक किया।




ये हैं तीन आरोपी

● मनीषा गुरुनाथ मंधारेे, वनस्पति और प्राणी विज्ञान की विशेषज्ञ




● मनीषा संजय वाघमारे, विशेषज्ञ भौतिकी विज्ञान




खामियां उजागर




● परीक्षा के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में कई विशेषज्ञों को एक से अधिक चरण में शामिल किया गया। समीक्षा चरण के बाद से विशेषज्ञों को अंतिम प्रश्न सेट तक पूरी पहुंच प्राप्त थी।




● यह स्थिति अनुवाद व पुन: अनुवाद के चरण में देखने को मिली।




ऐसे हुआ खुलासा




मोबाइल उपकरणों की फॉरेंसिक इमेजिंग के माध्यम से इस साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें हटाई गई व्हाट्सऐप चैट और लीक हुए प्रश्नों वाले पीडीएफ दस्तावेज बरामद किए गए।




अहम साक्ष्य और सुबूत




ऑडियो रिकॉर्डिंग (जिसमें 150 और 450 प्रश्नों के सेट की बात है) और कोचिंग का बायोमीट्रिक डाटा। पीडीएफ या हार्ड कॉपी में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और कीमतों का जिक्र है।




एनटीए के गोपनीय कक्ष में प्रवेश या निकास के समय विशेषज्ञों की तलाशी नहीं ली जाती थी। वहां लगे कैमरों का बैकअप 20-25 दिनों का ही था और लाइव फीड मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम नहीं था, इससे गतिविधियां पकड़ी नहीं गई।




उम्रकैद और एक करोड़ जुर्माना संभव




सीबीआई के लगाए गए प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर प्रत्येक आरोपी को उम्रकैद की सजा हो सकती है। इसके साथ ही एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना भी करना पड़ सकता है।

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