इस बार रक्षाबंधन को लेकर असमंजस में हैं? जानिए सही तारीख और शुभ मुहूर्त! 🧵
रक्षाबंधन की तारीख: सावन मास की पूर्णिमा दो दिन होने के बावजूद, मुख्य रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।
⏰ पूर्णिमा तिथि: पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 8:33 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:19 बजे तक रहेगी।
☀️ शुभ समय: अपराह्न से प्रदोष काल तक (सूर्यास्त के तुरंत बाद डेढ़ से दो घंटे का समय) रक्षा सूत्र बांधने का सबसे उत्तम समय है।
✨ विशेष योग: इस बार पर्व पर सौम्य और यायीजय योग का विशेष संयोग बन रहा है।
🚫 भद्र काल: शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में रक्षाबंधन वर्जित माना गया है, इसलिए 28 अगस्त को बहनें पूरे दिन भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
सावन पूर्णिमा दो दिन, 28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन
वाराणसी। इस बार सावन मास की पूर्णिमा दो दिन पड़ रही है, लेकिन रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 8:33 बजे से शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:19 बजे तक रहेगी।
धर्मशास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन के लिए अपराह्न से प्रदोष काल तक का समय शुभ माना गया है। 27 अगस्त को पूर्णिमा शुरू होने के साथ ही भद्रा भी रहेगी, जो रात 8:56 बजे तक रहने की बात कही गई है। शास्त्रों में भद्रा काल में रक्षाबंधन वर्जित माना गया है। ऐसे में बहनें 28 अगस्त को पूरे दिन भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।
सौम्य और यायीजय योग का बनेगा संयोग
इस वर्ष रक्षाबंधन पर सौम्य और यायीजय योग का विशेष संयोग बनने की बात कही गई है। पूर्णिमा के दिन मतावलंबियों के उपाकर्म और श्रावणी कर्म भी किए जाएंगे।
काशी में हयग्रीव जयंती और उत्पत्ति उत्सव भी मनाया जाएगा। भदैनी स्थित हयग्रीव मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ मध्याह्न में ऋषि तर्पण किया जाएगा।
रक्षासूत्र बांधने का मंत्र
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते समय यह मंत्र बोला जाता है—
“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
रक्षाबंधन मूल रूप से ब्राह्मणों का प्रमुख पर्व माना जाता है, लेकिन लोकाचार में इसका स्वरूप व्यापक हो गया है। बहनें भाइयों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाती हैं और उनकी दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना करते हुए रक्षा सूत्र बांधती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।

