नौकरी दिलाने के नाम पर बहनों से लाखों रुपये हड़पे, शिक्षक और क्लर्क की नौकरी का दिया था झांसा
लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। शिक्षा विभाग में नौकरी लगवाने का झांसा देकर दो बहनों से लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाज दंपती समेत सात लोगों ने दोनों बहनों से सवा पांच लाख रुपये से अधिक की रकम हड़प ली। पीड़ित बहनों ने मामले की शिकायत मड़ियांव थाने में करते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
शिक्षक और क्लर्क बनाने का दिया झांसा
पीड़ित बहनों का आरोप है कि जालसाजों ने शिक्षा विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया था। एक बहन को शिक्षिका और दूसरी को क्लर्क के पद पर नौकरी दिलाने की बात कही गई थी। नौकरी के नाम पर आरोपियों ने उनसे अलग-अलग तरीके से रकम ली।
शिकायत के मुताबिक, रकम लेने के बाद आरोपियों ने दोनों बहनों के मूल शैक्षिक दस्तावेज भी अपने पास रख लिए। बाद में जब नौकरी नहीं लगी तो पीड़ितों ने अपने रुपये और दस्तावेज वापस मांगे।
स्कूल में शिक्षिका से हुई थी आरोपी की मुलाकात
मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा के मुताबिक, क्षेत्र में रहने वाली स्वाती एक निजी स्कूल में शिक्षिका थीं। उनकी स्कूल में ही अंजली यादव से मित्रता हुई थी। अंजली के पति का नाम आकाश बताया गया है।
पीड़िता के अनुसार अंजली और उसके पति ने उसे कोर्ट मैरिज की जानकारी दी थी। इसी दौरान अंजली ने बताया कि उसके पति की शिक्षा विभाग के एक बड़े अधिकारी से अच्छी जान-पहचान है और वह नौकरी लगवाने में मदद कर सकते हैं।
शिक्षा विभाग में नौकरी का भरोसा देकर लिए रुपये
आरोप है कि अंजली और उसके पति ने स्वाती तथा उसकी बहन वंदना को शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। वंदना को सीतापुर के आरएमपी कॉलेज में क्लर्क ग्रेड की नौकरी दिलाने का दावा किया गया था।
इसी भरोसे पर दोनों बहनों से नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 5.28 लाख रुपये लिए गए। रकम लेने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली तो दोनों बहनों को ठगी का एहसास हुआ।
सात लोगों के खिलाफ मुकदमा
पीड़ित बहनों ने मड़ियांव थाने में दंपती समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ एवं अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार मामले में नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने, शैक्षिक दस्तावेज अपने पास रखने और कथित रूप से प्रभावशाली अधिकारियों से संपर्क होने का भरोसा दिलाने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।

