मातृत्व लाभ से भर्ती तक का रिकॉर्ड अनिवार्य
सामाजिक सुरक्षा नियमावली में निधि, निर्माण उपकर से जुड़े प्रावधान स्पष्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सामाजिक सुरक्षा संहिता नियमावली-2026 में महिला कर्मचारियों के मातृत्व लाभ का विस्तृत रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है। इसमें बीमारी का प्रमाण, प्रसव से पहले दिया गया अग्रिम लाभ, प्रसव के बाद शेष लाभ, मातृत्व बोनस और अवकाश अवधि की मजदूरी का ब्योरा शामिल होगा। कर्मचारी की मृत्यु पर लाभ किसे दिया गया और बच्चा जीवित होने पर उसकी ओर से लाभ किसे तथा कितनी अवधि तक दिया गया, इसका भी रिकॉर्ड रखना होगा। मातृत्व लाभ या चिकित्सा बोनस रोकने अथवा मातृत्व अवकाश में सेवा समाप्त करने पर निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता के समक्ष शिकायत की जा सकती है।
असंगठित कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा निधि में राज्य की एकमुश्त राशि, केंद्र व राज्य अनुदान, पंजीकरण-नवीनीकरण की रकम, योजनाओं की धनराशि और नियोक्ताओं के सामाजिक उत्तरदायित्व से प्राप्त राशि जमा होगी। ब्याज भी निधि में शामिल होगा। बोर्ड का प्रशासनिक खर्च योजनागत खर्च के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
खातों का वार्षिक ऑडिट सीएजी से कराया जाएगा। एक साल से अधिक चलने वाली निर्माण परियोजनाओं में हर साल जमा उपकर का अलग रिकॉर्ड रखना होगा। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को कर्मचारियों, भर्तियों, रिक्तियों और अगले वित्तीय वर्ष में संभावित रिक्तियों का विवरण भी दर्ज करना होगा। निजी प्रतिष्ठानों को भी सरकार अधिसूचना से इसके दायरे में ला सकती है। ब्यूरो
नियमों में प्रक्रिया स्पष्ट: नियमावली में सामाजिक सुरक्षा के लाभों को प्रभावी तरीके से लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। श्रमिकों को अधिकार देने के साथ भुगतान, शिकायत और निस्तारण की व्यवस्था भी तय की गई है। इससे श्रमिकों के हित सुरक्षित होंगे और नियोक्ताओं की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। — डॉ. एमकेएस सुंदरम, प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन

