संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में बकाए पारिश्रमिक की मांग पर शिक्षकों ने मूल्यांकन का बहिष्कार कर दिया। नाराज शिक्षकों ने बृहस्पतिवार ने को मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करने के बाद धरना प्रदर्शन किया। चीफ प्राक्टर और परीक्षा नियंत्रक ने शिक्षकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन शिक्षक नहीं माने। बृहस्पतिवार को पाणिनी भवन के पास धरने पर बैठे शिक्षकों ने बताया कि 2016 से उनका पारिश्रमिक बकाया है बार-बार आश्वासन के बाद अब तक भुगतान नहीं किया गया है।
परीक्षकों का आरोप है कि कुलपति से जब बकाए पारिश्रमिक की मांग की गई तो उन्होंने सभी परीक्षकों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। कुलपति के आदेश के खिलाफ शिक्षक धरने पर बैठ गए। कुलपति ने शिक्षकों को वार्ता के लिए भी बुलाया, लेकिन शिक्षक कुलपति को धरना स्थल पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। धरने में संस्कृत विद्यालय शिक्षक समिति के प्रदेश अध्यक्ष डा गणेश दत्त शास्त्री, मंडल संयोजक डॉ अनिल राय, जिला अध्यक्ष डॉ.सुरेश चंद्र उपाध्याय, उपाध्यक्ष डॉ. रमाकांत पांडेय, डॉ. महिनारायाण पाठक आदि ने सभा को संबोधित किया। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि मूल्यांकन के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत महाविद्यालय के हर शिक्षक को 15-15 बंडल कॉपियां जांचने के लिए मिलेंगी। विश्वविद्यालय से संबद्ध 550 महाविद्यालय के शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा।

