लखनऊ। शिक्षकों की कमी से शहर के प्राइमरी स्कूलों की पढ़ाई चौपट हो गई है। नगर क्षेत्र के 43 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं। इनमें से कुछ विद्यालयों में एक शिक्षक दूसरे स्कूल से अटैच किया गया है तो कुछ स्कूल केवल शिक्षामित्र के भरोसे हैं। कई वर्षों से शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया और समायोजन नहीं होने से परिषदीय स्कूल शिक्षक विहीन होते जा रहे हैं।
नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय शिक्षकों की कमी के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। इसका असर यहां के बच्चों की पढ़ाई पर बुरी तरह पड़ रहा है। नगर क्षेत्र में 252 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें से 195 प्राथमिक और 57 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से 43 विद्यालय शिक्षक विहीन हैं। इनमें 30 स्कूल प्राथमिक और 13 विद्यालय उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। प्राथमिक में कक्षा एक से पांच तक और उच्च प्राथमिक में कक्षा छह से आठ तक के बच्चों की पढ़ाई होती है। कुछ विद्यालयों में जैसे-तैसे एक-एक शिक्षक अटैच कर रखा है। वेतन मूल विद्यालय के आधार पर ही मिलता है। बाकी स्कूल शिक्षामित्रों के हवाले हैं। शहरी क्षेत्र में शिक्षकों की इस कमी से यहां पर पढ़ाई के स्तर का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
■ एक शिक्षक के हवाले 13 किताबें:-
जिन विद्यालयों में पास के स्कूल से एक-एक शिक्षक अटैच कर रखे हैं, वहां पर पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित है। शिक्षक कई कक्षाओं के छात्रों को एकसाथ पढ़ाते हैं। प्राथमिक विद्यालयों में एक कक्षा में पांच किताबें हैं, जबकि उच्च प्राथमिक में 13 किताबें हैं। एक ही शिक्षक के हवाले सभी किताबें पढ़ाने का जिम्मा है। जैसे-तैसे पढ़ाई होती है। ऐसे विद्यालयों में छात्र संख्या भी नहीं बढ़ती।
