एटा। एक तरफ लोकसभा चुनाव की तिथि नजदीक आती जा रही है तो वहीं दूसरी ओर प्रत्याशियों की कमजोरी को ढूंढने में वोटर भी कम रूचि नहीं ले रहे हैं सरकार द्वारा किये हुए एक-एक वायदे को वह ध्यान से देख व सुन रहे हैं तो वहीं स्थानीय मुददे एवं पार्टी प्रत्याशियों में भी कमी निकालने में कम रूचि नहीं ले रहे हैं। ऐसा ही मामला एटा लोकसभा पर भी फंसता नजर आ रहा है। यहां बीजेपी ने अपने सिटिंग सासद पर भरोसा जताकर उनको टिकिट दिया है तो वहीं युवा बेरोजगार भी पार्टी प्रत्याशी को सबक सिखाने के लिए तैयार बैठा है। इसका उदाहरण प्राथमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया को स्थगित किए जाने को लेकर बताया जा रहा है। देखना याह है कि यह बेरोजगार युवा क्या निर्णय लेता है इसके लिए अभी चुनाव में समय है।
युवा बेरोजगारों का कहना हैं कि वह काफी समय से प्राथमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया की राह देख रहे हैं इसके लिए उन्होंने यूपी टैट एवं सीटेट की परीक्षा उत्तीर्ण की है लेकिन उनके अरमानों पर पानी उस समय फिर गया जब विधान सभा सत्र के दौरान सपा पार्टी के विधायकों ने बेसिक शिक्षा विभाग में भर्ती प्रक्रिया की आवाज उठाई। लेकिन उसके जबाब में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह ने कहा कि प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की इस समय कोई योजना नहीं हैं। इसके जबाब में उनका तर्क था कि जो अनुपात छात्र शिक्षकों के लिए है उसको प्रदेश के शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों को जोड़कर देखा जाय तो वह अनुपात पूरा हो जाता है इसलिए भर्ती का तो सवाल ही नहीं उठता। जबकि इसके तर्क में विपक्ष का यहां तक कहना था कि जब अनुदेशक एवं शिक्षामित्र शिक्षक में सुमार नहीं हैं तो अनुपात में कैसे जोडा जा सकता है लेकिन इसके लिए सरकार एवं विभागीय मंत्री के पास कोई जबाब नहीं है।
मंत्री के पास योजना नहीं तो हमारी भी योजना नहीं
युवाओं ने अपना तर्क दिया है कि जब बेसिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह के पास अभी विभाग में भर्ती किए जाने की कोई योजना नहीं है तो उनके पिताश्री को भी मत देने की अभी कोई योजना नहीं है वह अपने विभाग में योजना की तैयारी करें तभी अपने पिताश्री के लिए मत देने की आशा और उम्मीदें बरकरार रखें।


