मध्यप्रदेश में पहली बार 7 लाख कर्मचारियों और 5 लाख पेंशनर्स की लड़ाई लड़ने वाले संगठनों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं। अब इतने बड़े वर्ग की लड़ाई लड़ने वाला कोई नहीं है। मान्यता खत्म होने से ये संगठन न तो सरकार से पत्राचार कर सकते हैं न अपनी बात मंत्री-अफसरों से मिलकर बता सकते। पंजीयन निरस्त करने वाली संस्था उद्योग विभाग के अधीन है और यह विभाग सीएम डॉ. मोहन यादव के पास है। मामला सीएम तक पहुंचा तो उन्होंने रजिस्ट्रार फर्म्स
सोसायटी को तलब किया गया है। प्रदेश में 3 लाख कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ का पंजीयन निरस्त होने के बाद मामला हाई कोर्ट में है। अब मंत्रालय कर्मचारी संघ, विधानसभा कर्मचारी संघ व पेंशनर्स एसो. का पंजीयन निरस्त हुआ है।


